US-Canada Trade War: कनाडा का ट्रंप को करारा जवाब, 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर टैरिफ

अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर अब और गहराता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ के जवाब में कनाडा ने करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर जवाबी शुल्क लगाने का ऐलान किया है। सवाल है कि कौन-कौन से अमेरिकी उत्पाद महंगे होंगे और इस कदम का असर कितना बड़ा होगा?

US-Canada Trade War : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति के जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाने का फैसला किया है। कनाडा सरकार ने करीब 20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसके साथ ही घरेलू कंपनियों, कर्मचारियों और अन्य प्रभावित वर्गों को राहत देने के लिए कई अरब डॉलर के आर्थिक सहायता पैकेज का भी ऐलान किया गया है।

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8 सितंबर से लागू होंगे नए जवाबी टैरिफ

कनाडा की ओर से घोषित C$27.6 अरब यानी करीब 19.94 अरब डॉलर के जवाबी टैरिफ 8 सितंबर से लागू होंगे। इन शुल्कों के दायरे में अमेरिका से आयात होने वाले लगभग 700 उत्पाद शामिल किए गए हैं। अलग-अलग वस्तुओं पर 15 से 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जाएगा। कनाडा का यह कदम दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से चल रहे व्यापार विवाद को और गहरा कर सकता है।

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700 अमेरिकी उत्पाद कनाडा के निशाने पर

कनाडा ने जिन अमेरिकी उत्पादों को जवाबी शुल्क के दायरे में रखा है, उनमें कई प्रमुख औद्योगिक और उपभोक्ता वस्तुएं शामिल हैं। स्टील, एल्युमीनियम, फर्नीचर और कपड़ों पर सबसे अधिक 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। वहीं चीज, घरेलू उपकरण और कुछ समुद्री खाद्य उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क प्रस्तावित है। कनाडाई सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और टूल्स पर 15 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा।

ऊर्जा और पोटाश को टैरिफ से रखा दूर

ओटावा ने अपनी जवाबी कार्रवाई को जानबूझकर सीमित और चुनिंदा रखा है। कनाडा ने ऊर्जा और पोटाश जैसे संवेदनशील उत्पादों को नए जवाबी टैरिफ से बाहर रखा है। इन क्षेत्रों का दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और व्यापार के लिए काफी महत्व है। सरकार का कहना है कि इस रणनीति के जरिए वह अमेरिका पर दबाव बनाने के साथ-साथ अपने महत्वपूर्ण आर्थिक हितों को भी सुरक्षित रखना चाहती है।

कनाडा ने अपनाया ‘अनुपातिक’ जवाब

कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने कहा कि सरकार ने जवाबी कार्रवाई में अनुपातिक दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने बताया कि किन अमेरिकी उत्पादों को टैरिफ के दायरे में रखा जाए, इसका फैसला पिछले व्यापार विवादों से मिले अनुभव के आधार पर किया गया। उनका कहना है कि अमेरिका के नए शुल्कों का कनाडा के छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों पर काफी गंभीर असर पड़ सकता है।

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कंपनियों और कर्मचारियों के लिए बड़ा सपोर्ट पैकेज

कनाडा सरकार ने टैरिफ की घोषणा के साथ घरेलू व्यवसायों और कर्मचारियों के लिए C$7.5 अरब यानी करीब 5.42 अरब डॉलर के नए और विस्तारित वित्तीय उपायों की घोषणा की है। इस सहायता पैकेज का उद्देश्य व्यापार युद्ध से प्रभावित कंपनियों और कर्मचारियों को आर्थिक झटके से बचाना है। सरकार विशेष रूप से उन कारोबारों को राहत देना चाहती है, जिनकी अमेरिकी बाजार से जुड़ी गतिविधियां नए शुल्कों के कारण प्रभावित हो सकती हैं।

छोटे और मध्यम व्यवसायों को मिलेगी मदद

सपोर्ट पैकेज में छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों के लिए विशेष सहायता शामिल है। इसके तहत कंपनियों को नकदी प्रवाह बनाए रखने और व्यापारिक गतिविधियों को जारी रखने में मदद देने की योजना है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त वित्तीय सहयोग से कंपनियां टैरिफ के दबाव के बावजूद घरेलू बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनाए रख सकेंगी।

अमेरिकी टैरिफ से नौकरियों पर भी खतरा

कनाडा सरकार ने उन कर्मचारियों के लिए भी सहायता की घोषणा की है, जिनकी नौकरियां अमेरिका की नई टैरिफ नीति के कारण खतरे में पड़ सकती हैं। सरकार का लक्ष्य व्यापारिक विवाद से पैदा होने वाले रोजगार संकट को सीमित करना है। वित्त मंत्री ने कहा कि कर्मचारियों, किसानों, परिवारों और व्यवसायों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

कनाडा-अमेरिका व्यापार संबंधों में बढ़ा तनाव

कनाडा का जवाबी टैरिफ ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता विफल हो चुकी है और अमेरिका की नई ड्यूटी पहले ही लागू हो गई है। ओटावा की ताजा कार्रवाई से दुनिया की दो करीबी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ने की आशंका है। दोनों देशों के कारोबारी और उद्योग जगत अब इस बात पर नजर रख रहे हैं कि बढ़े हुए टैरिफ का कीमतों, सप्लाई चेन और रोजगार पर कितना असर पड़ता है।

कनाडा की प्राथमिकता घरेलू अर्थव्यवस्था की सुरक्षा

कनाडाई सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य व्यापार युद्ध को बढ़ाना नहीं, बल्कि अमेरिकी टैरिफ से घरेलू अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को कम करना है। सरकार ने डॉलर-के-बदले-डॉलर और दर-के-बदले-दर की रणनीति अपनाते हुए जवाब दिया है। साथ ही अरबों डॉलर के राहत पैकेज के जरिए व्यवसायों और कर्मचारियों को सहारा देने की कोशिश की गई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और व्यापार नीति इस विवाद की दिशा तय करेगी।

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Chandan Das

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