Karnataka caste census: कर्नाटक में जाति जनगणना शुरू, हाईकोर्ट में चुनौती: क्या वाकई है इसके पीछे राजनीतिक मंशा?

Karnataka caste census: कर्नाटक में जाति आधारित सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण यानी जाति जनगणना की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो चुकी है, जो 7 अक्टूबर 2025 तक चलेगी। इस बीच राज्य हाईकोर्ट में इस सर्वेक्षण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर आज सुनवाई होनी है। याचिका में दावा किया गया है कि इस जनगणना के पीछे राजनीतिक उद्देश्य छिपे हुए हैं।हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि इस सर्वे का उद्देश्य केवल कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी बनाने के लिए आधारभूत डेटा इकट्ठा करना है। यह जनगणना कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा संचालित की जा रही है और इसे 420 करोड़ रुपए की लागत से वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है।

ads

हाईकोर्ट की निगरानी में हो सकती है कार्यवाही

मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और जस्टिस सीएम जोशी की खंडपीठ याचिका पर सुनवाई करते हुए, इस प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने या सख्त दिशानिर्देश जारी करने का फैसला कर सकती है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस प्रकार की जनगणना का इस्तेमाल कुछ वर्गों को चुनावी लाभ पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।

Adst

2 करोड़ घरों में 7 करोड़ लोगों पर सर्वे

इस जाति जनगणना में करीब 1.75 लाख कर्मचारी, जिनमें बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल के शिक्षक शामिल हैं, करीब 2 करोड़ घरों में जाकर 7 करोड़ लोगों की जानकारी इकट्ठा करेंगे। इस सर्वेक्षण में 60 सवाल पूछे जाएंगे और इसे पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित किया जाएगा।हर घर को उसके बिजली मीटर नंबर के आधार पर जियो-टैग किया जाएगा और यूनीक हाउसहोल्ड आईडी (UHID) जारी की जाएगी। इसके साथ ही राशन कार्ड, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर को भी जोड़ा जाएगा।

डुअल आइडेंटिटी जातियों को लेकर विवाद

इस जनगणना में कुरुबा ईसाई, ब्राह्मण ईसाई जैसी डुअल आइडेंटिटी (दोहरी पहचान) वाली 33 जातियों को फिलहाल सर्वे एप में नहीं दिखाया जाएगा। हालांकि, आयोग का कहना है कि इनके नाम छिपाए जाएंगे, हटाए नहीं जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति अपनी पहचान प्रकट करना चाहे तो वह स्वेच्छा से जानकारी दे सकता है।

2015 के सर्वे पर आपत्ति, नई प्रक्रिया शुरू

इससे पहले वर्ष 2015 में एक जाति सर्वे कराया गया था, लेकिन वोक्कालिगा और वीरशैव-लिंगायत जैसे प्रभावशाली समुदायों ने उस सर्वे को अवैज्ञानिक बताते हुए नई जनगणना की मांग की थी। इसी के बाद 12 जून 2025 को राज्य सरकार ने नए सर्वे को मंजूरी दी और पुराने सर्वे को रद्द कर दिया। कर्नाटक में जाति जनगणना को लेकर राजनीति और सामाजिक हितों के बीच टकराव साफ नजर आ रहा है। जहां एक ओर सरकार इसे नीतिगत सुधारों के लिए आवश्यक बता रही है, वहीं कुछ संगठन और नागरिक इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश मान रहे हैं। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह सर्वे रोक दिया जाएगा या जारी रहेगा।

Read More: Alexander Duncan: टेक्सास में हनुमान प्रतिमा पर विवाद: अलेक्जेंडर डंकन की टिप्पणी से भड़के हिंदू संगठन

Admin

Admin

Writer & Blogger

All Posts
Previous Post
Next Post

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.