CEC Gyanesh Kumar : विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक और कानूनी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर किए जाने की बात सामने आई है। याचिका में चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त के स्तर पर लिए गए फैसलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से आयोग में सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन किए जाने की मांग की गई है।
14 आदेशों को रद्द करने की मांग
नई याचिका में पिछले करीब 10 महीनों के दौरान ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में जारी 14 आदेशों को चुनौती दिए जाने की बात कही गई है। याचिका में इन आदेशों, अधिसूचनाओं और कार्यकारी निर्देशों की वैधता की जांच करने तथा उन्हें रद्द करने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, ऐसे आदेशों की न्यायिक वैधता पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके बाद के आदेशों पर निर्भर करेगा।
सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर उठाए गए सवाल
याचिका में कथित तौर पर यह मुद्दा उठाया गया है कि निर्वाचन आयोग जैसे बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्थान में महत्वपूर्ण फैसले निर्धारित सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 324 और चुनाव आयोग के कामकाज से संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लेने के निर्देश देने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी CEC के कामकाज और SIR से जुड़े एक मामले पर सुनवाई के लिए सहमत हो चुका है।
चुनाव आयोग ने आरोपों से अलग रखा अपना पक्ष
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर लगाए जा रहे इन आरोपों से असहमति जताई है। आयोग का कहना है कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय और टिप्पणियां आना सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले सभी तीन चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे और उसके आदेश वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप हैं।
पहले भी दायर हो चुकी हैं याचिकाएं
ज्ञानेश कुमार के कामकाज और SIR से जुड़े विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में इससे पहले भी याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं। एक याचिका में CEC के खिलाफ कथित एकतरफा निर्णय लेने का आरोप लगाते हुए संवैधानिक प्रक्रिया के पालन की मांग की गई है। अदालत ने इस मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है। इससे चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर कानूनी बहस और आगे बढ़ गई है।
14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद भी गहरा हुआ जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में SIR से संबंधित फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने बाद में आंतरिक मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि अलग-अलग टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं।
INDIA गठबंधन ने भी बनाई रणनीति
इसी विवाद के बीच INDIA गठबंधन के नेताओं ने 30 सितंबर को नई दिल्ली में बैठक की। बैठक में SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक बैठक में कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए और चुनाव आयोग के खिलाफ राजनीतिक अभियान तथा विरोध कार्यक्रमों को लेकर चर्चा की गई।
6 अक्टूबर को मार्च की तैयारी
बैठक के बाद विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग तक मार्च सहित आगे के कार्यक्रमों की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार INDIA गठबंधन ने 6 अक्टूबर को संसद से चुनाव आयोग तक मार्च करने की रणनीति बनाई है। विपक्ष SIR और CEC की भूमिका से जुड़े मुद्दों को लेकर देशव्यापी राजनीतिक अभियान चलाने की तैयारी में है।
अखिलेश यादव बैठक में नहीं हुए शामिल
INDIA गठबंधन की बैठक में समाजवादी पार्टी की ओर से दो सांसद शामिल हुए, जबकि पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बैठक में मौजूद नहीं थे। रिपोर्टों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा नामांकन से जुड़ी गतिविधियों के कारण उन्होंने बैठक में हिस्सा नहीं लिया और उनकी जगह पार्टी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
NDA नेताओं ने विपक्ष पर किया पलटवार
विपक्षी दलों की बैठक और CEC को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच भाजपा और उसके सहयोगी दलों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विपक्ष के आरोपों को सरकार और चुनाव आयोग ने खारिज किया है। चुनाव आयोग का कहना है कि SIR की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के तहत चल रही है। अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई और चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई पर इस पूरे विवाद की दिशा निर्भर करेगी।
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