राष्ट्रीय

India Census 2027: 10 नवंबर से पहला प्री-टेस्ट शुरू, जातीय गणना भी होगी शामिल

India Census 2027 : भारत की अगली जनगणना 2027 की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल ने गुरुवार को घोषणा की कि जनगणना का पहला प्री-टेस्ट 10 नवंबर से 30 नवंबर तक आयोजित किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण परीक्षण देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा और इसका मुख्य फोकस हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस पर होगा।

प्री-टेस्ट का उद्देश्य: डिजिटल तैयारी की जाँच

जनगणना 2027 से पहले यह प्री-टेस्ट डेटा संग्रह के तरीकों, लॉजिस्टिक्स, फील्ड ट्रेनिंग और सबसे महत्वपूर्ण, डिजिटल टूल्स की कार्यप्रणाली की जांच करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। इसका मकसद मुख्य जनगणना से पहले ज़मीनी स्तर की चुनौतियों और कमियों का आकलन करना है। इस परीक्षण में मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा कलेक्शन और नागरिकों द्वारा स्वयं डेटा भरने की प्रक्रिया (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का भी परीक्षण किया जाएगा, जो इसे पिछली जनगणनाओं से अलग बनाता है।

दो चरणों में होगी जनगणना, जून में जारी हुआ था गजट

गृह मंत्रालय ने इसी साल 16 जून को जनगणना के लिए आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। इस नोटिफिकेशन के अनुसार, 2027 की जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी:

पहला चरण: इसकी शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से होगी। इस चरण में चार पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में जनगणना का कार्य किया जाएगा।

दूसरा चरण: यह 1 मार्च 2027 से शुरू होगा, जिसमें देश के बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना का कार्य किया जाएगा।

आज़ादी के बाद पहली ‘जातीय जनगणना’

केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को जातीय जनगणना (Caste Census) कराने का भी ऐतिहासिक ऐलान किया था। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की थी कि जातीय जनगणना को मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा। यह देश की आज़ादी के बाद पहली जातीय जनगणना होगी। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल लंबे समय से इसकी मांग करते रहे हैं।

2011 में टल गई थी जनगणना

भारत में जनगणना हर 10 साल में आयोजित की जाती है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इस हिसाब से अगली जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था।

याद दिला दें कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना (SECC) कराई गई थी, लेकिन इसके जातिगत आंकड़े कभी सार्वजनिक नहीं किए गए थे। अब 2027 की जनगणना में जातीय जनगणना को शामिल करने का निर्णय, देश की सामाजिक और आर्थिक नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।

जनगणना 2027 का पहला प्री-टेस्ट भारत के इस सबसे बड़े और महत्वपूर्ण सांख्यिकीय अभ्यास के लिए एक मजबूत नींव रखने जा रहा है।

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