Census 2027: भारत में प्रस्तावित जनगणना 2027 को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने गणनाकारों की नियुक्ति से जुड़े नियमों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि नए प्रावधानों के जरिए जनगणना के लिए नियुक्त किए जा सकने वाले लोगों का दायरा बढ़ाया गया है। उनके मुताबिक, इससे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े कार्यकर्ताओं की नियुक्ति का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने इस बदलाव को जनगणना की निष्पक्षता और पारदर्शिता से जोड़ते हुए सरकार से सवाल किए हैं। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस नेता के हैं और इन्हें किसी प्रमाणित अनियमितता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
गणनाकारों की नियुक्ति के नए प्रावधान पर विवाद
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय की ओर से जारी अधिसूचना का हवाला दिया। यह कार्यालय केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। कांग्रेस नेता के अनुसार, अधिसूचना में गणनाकारों की नियुक्ति के लिए पात्र लोगों का दायरा बढ़ाया गया है। उन्होंने दावा किया कि शिक्षकों और विभिन्न सरकारी तथा गैर-सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों के अतिरिक्त ऐसे व्यक्ति को भी गणनाकार नियुक्त किया जा सकता है, जिसे संबंधित राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन उपयुक्त समझे। रमेश ने इसी प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए आशंका व्यक्त की कि इससे राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की नियुक्ति की संभावना बढ़ सकती है।
RSS के प्रशिक्षण शिविर का हवाला देकर लगाए आरोप
कांग्रेस नेता ने जनगणना से जुड़े नए प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए RSS की गतिविधियों का भी उल्लेख किया। जयराम रमेश का दावा है कि 10 से 12 जुलाई 2026 के बीच कर्नाटक के बेलगावी में RSS ने अपने कार्यकर्ताओं के लिए जनगणना 2027 पर केंद्रित एक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था। उनके मुताबिक, इस शिविर का मुख्य एजेंडा जनगणना 2027 था। रमेश ने इस आयोजन को गणनाकारों की नियुक्ति से जुड़े नियमों में बदलाव के संदर्भ में उठाया और आरोप लगाया कि इससे RSS तथा BJP से जुड़े लोगों को प्रक्रिया में शामिल करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, प्रशिक्षण शिविर आयोजित होने और जनगणना में किसी कार्यकर्ता की नियुक्ति होने के बीच संबंध स्थापित करने के लिए अलग से प्रमाण आवश्यक होंगे।
जनसांख्यिकीय बदलावों पर गठित समिति को लेकर भी सवाल
जयराम रमेश ने गृह मंत्रालय की ओर से गठित जनसांख्यिकीय बदलावों से संबंधित उच्चस्तरीय समिति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि समिति ने 14 अक्टूबर 2026 को देश में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को लेकर भारतीय और विदेशी संगठनों सहित आम लोगों से सुझाव मांगे थे। कांग्रेस नेता ने समिति की संरचना पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके सदस्यों का संबंध RSS से जुड़े वैचारिक और संस्थागत दायरे से है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में समिति की निष्पक्षता और उसके समक्ष प्रस्तुत होने वाले सुझावों की समीक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, समिति के सदस्यों के संबंधों और उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
जनगणना की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी राजनीतिक बहस का केंद्र
जनगणना देश की आबादी, सामाजिक संरचना और अन्य महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय पहलुओं से जुड़ी जानकारी जुटाने की एक प्रमुख प्रक्रिया है। इसके आंकड़ों का उपयोग नीतियां बनाने, विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने और संसाधनों के वितरण जैसे कार्यों में किया जाता है। ऐसे में गणनाकारों की नियुक्ति के नियमों और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर उठने वाले सवाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे को राजनीतिक निष्पक्षता से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, नियुक्ति के प्रावधानों को लेकर अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए अधिसूचना के वास्तविक शब्दों, संबंधित नियमों और नियुक्ति प्रक्रिया की आधिकारिक व्याख्या को देखना आवश्यक है। फिलहाल, जयराम रमेश के आरोपों ने जनगणना 2027 को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।