CG Muharram News: छत्तीसगढ़ में इस साल मुहर्रम के आयोजन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। राज्य वक्फ बोर्ड ने एक आधिकारिक फरमान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब पूरे प्रदेश में मुहर्रम का त्योहार पूरी तरह से शरियत के नियमों और इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार ही मनाया जाएगा। इस नए आदेश के लागू होने के बाद से मुहर्रम के दौरान होने वाले पारंपरिक आयोजनों में कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। बोर्ड द्वारा जारी किए गए इन नए दिशा-निर्देशों का मुख्य उद्देश्य त्योहार की पवित्रता, गंभीरता और गरिमा को बनाए रखना है, ताकि इस मजहबी अवसर पर किसी भी प्रकार की फिजूलखर्ची या अनुचित दिखावा न हो सके।

बैंड-बाजे और आतिशबाजी पर पूरी तरह से लगाया गया प्रतिबंध
राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा जारी किए गए विस्तृत दिशा-निर्देशों में सबसे बड़ा और कड़ा फैसला मुहर्रम के जुलूसों और ताजियों के दौरान होने वाले शोर-शराबे को लेकर लिया गया है। नए नियमों के तहत अब मुहर्रम के मौके पर डीजे, लाउड बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों के अनियंत्रित उपयोग और किसी भी प्रकार की आतिशबाजी यानी पटाखा फोड़ने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। बोर्ड का मानना है कि मुहर्रम का महीना मूल रूप से शोक, इबादत और आत्मनिरीक्षण का समय होता है। ऐसे में तड़क-भड़क वाले बैंड-बाजे बजाना और आतिशबाजी करना इस अवसर की धार्मिक गंभीरता और शरियत के मूल सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है। इसलिए इन सभी आधुनिक और गैर-मजहबी तौर-तरीकों को आयोजनों से पूरी तरह दूर रखने को कहा गया है।

नियमों की अनदेखी करने वालों पर की जाएगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने केवल नियम ही नहीं बनाए हैं, बल्कि उन्हें कड़ाई से धरातल पर लागू करने के लिए सख्त कानूनी रुख भी अख्तियार कर लिया है। बोर्ड ने अपने आदेश में साफ तौर पर चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति या संस्था इन नियमों का उल्लंघन करेगी, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यदि किसी भी क्षेत्र में जारी किए गए सरकारी और धार्मिक दिशा-निर्देशों की अनदेखी की जाती है, तो उसके लिए सीधे तौर पर वहां की संबंधित मस्जिद समिति, मुहर्रम इंतेजामिया कमेटी या स्थानीय आयोजन समिति को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। बोर्ड ऐसी समितियों के खिलाफ न सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई करेगा, बल्कि उनके कामकाज और प्रबंधन की समीक्षा भी की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
उल्लंघन की स्थिति में लगेगा 50 हजार रुपये तक का भारी जुर्माना
दंडात्मक कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए वक्फ बोर्ड ने आर्थिक दंड का भी कड़ा प्रावधान जोड़ा है। आदेश के मुताबिक, अगर किसी भी आयोजन समिति या मुहर्रम के जुलूस में बैंड-बाजा, आतिशबाजी या शरियत के खिलाफ कोई भी गतिविधि पाई जाती है, तो दोषी समिति पर ₹50,000 (पचास हजार रुपये) तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यह जुर्माना राशि नियमों की अवहेलना करने वालों के लिए एक कड़ा सबक होगी। बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि जुर्माना लगाने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और फील्ड अफसरों को हर जिले में पैनी नजर रखने के निर्देश दे दिए गए हैं।
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धार्मिक कार्यक्रमों को पूरी गंभीरता और अनुशासन से संचालित करने की अपील
सख्त नियमों और जुर्माने के प्रावधानों के साथ-साथ राज्य वक्फ बोर्ड ने प्रदेश के तमाम मुस्लिम समुदाय और मुहर्रम आयोजकों से एक विशेष और भावुक अपील भी की है। बोर्ड के पदाधिकारियों ने कहा है कि मुहर्रम के सभी छोटे-बड़े धार्मिक कार्यक्रमों, मजलिसों और ताजिया के जुलूसों का संचालन पूरी गंभीरता, उच्च अनुशासन और आपसी सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। मुहर्रम का संदेश शांति, न्याय और मानवता के प्रति समर्पण का है, इसलिए पूरे माहौल में वही रूहानियत और सादगी नजर आनी चाहिए जो सदियों से इस महीने की पहचान रही है।
अव्यवस्था और आपसी विवादों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम
इसके अतिरिक्त, बोर्ड ने सभी प्रबंधन समितियों को यह कड़ा निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षा और व्यवस्था का पूरा ध्यान रखें। यह सुनिश्चित करना हर कमेटी की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी कि आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार का आपसी विवाद, कानून-व्यवस्था की समस्या, सांप्रदायिक अव्यवस्था या कोई भी ऐसी अनुचित गतिविधि सामने न आए जिससे समाज का ताना-बाना टूटे या धार्मिक माहौल प्रभावित हो। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर रूट चार्ट बनाने और वॉलिंटियर्स तैनात करने की बात भी कही गई है, ताकि छत्तीसगढ़ की गंगा-जमुनी तहजीब और शांतिपूर्ण माहौल को पूरी तरह बरकरार रखा जा सके।
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