NDA Mangal Milan Meeting: संसद के मानसून सत्र के दौरान जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच मंगलवार सुबह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की महत्वपूर्ण ‘मंगल मिलन’ संसदीय दल की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक नई दिल्ली स्थित संसद पुस्तकालय भवन के जीएमसी बालयोगी सभागार में सुबह 9:30 बजे शुरू हुई। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित एनडीए के विभिन्न घटक दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। संसद में चल रहे महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और विपक्ष के विरोध के बीच आयोजित इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।

पहली बार एनसीपीआई सांसदों को मिला निमंत्रण
इस बैठक की सबसे बड़ी विशेषता नवगठित नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) की भागीदारी रही। पहली बार इस पार्टी के सांसदों को एनडीए संसदीय दल की बैठक में आमंत्रित किया गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले सांसदों की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। बैठक में सुदीप बंदोपाध्याय, काकोली घोष, शताब्दी रॉय, शर्मिला सरकार और मिताली बाग सहित कई प्रमुख नेताओं के शामिल होने की संभावना जताई गई। इससे यह संकेत भी मिल रहा है कि राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

मानसून सत्र में परीक्षा सुधार बना प्रमुख मुद्दा
संसद का मौजूदा मानसून सत्र परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली है। इसी माहौल के बीच सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से नया विधायी प्रस्ताव पेश किया है। इस विषय पर संसद के दोनों सदनों में लगातार राजनीतिक बहस जारी है।
लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पर सरकार का जोर
सोमवार को केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया। विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध और नारेबाजी की, जिसके कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। दूसरी ओर विपक्ष इस कानून की प्रभावशीलता और इसके विभिन्न प्रावधानों पर सवाल उठा रहा है।
विधेयक में किए गए प्रमुख संशोधन
प्रस्तावित संशोधन विधेयक के माध्यम से वर्ष 2024 के मूल कानून में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें समयबद्ध जांच और मुकदमों के निपटारे की व्यवस्था, विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन, विशेष जांच दल और लोक अभियोजकों की नियुक्ति, दोषियों के लिए कठोर दंड, भारी आर्थिक जुर्माने का प्रावधान तथा अपील प्रक्रिया को अधिक सरल और प्रभावी बनाने जैसे कदम शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन संशोधनों से परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
बहस के लिए युवा सांसदों को मिली जिम्मेदारी
विधेयक पर संसद में प्रस्तावित छह घंटे की चर्चा के लिए एनडीए ने अपने कई युवा सांसदों को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा की ओर से बांसुरी स्वराज और तेजस्वी सूर्या चर्चा में प्रमुख वक्ता होंगे। इसके अलावा जनता दल (यूनाइटेड) के आलोक कुमार सुमन, तेलुगु देशम पार्टी के लावु श्री कृष्ण देवरायालु, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुनील तटकरे, अपना दल की अनुप्रिया पटेल और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अरुण भारती सहित गठबंधन के अन्य सांसद भी चर्चा में भाग लेंगे। नई सहयोगी पार्टी NCPI की ओर से भी प्रतिनिधियों को बोलने का अवसर मिलने की संभावना है।
राजनीतिक रणनीति के लिहाज से अहम मानी जा रही बैठक
एनडीए की यह बैठक केवल संसदीय रणनीति तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्ष लगातार छात्रों से जुड़े मुद्दों और संसद के भीतर उठाए जा रहे विभिन्न सवालों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है। ऐसे में सत्तापक्ष अपने सहयोगी दलों के साथ समन्वय स्थापित कर आगामी संसदीय रणनीति तय करने की तैयारी में जुटा है। बैठक के दौरान विभिन्न विधेयकों, संसद की कार्यवाही और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना जताई गई।
सरकार ने दोहराया परीक्षा सुधार का संकल्प
सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे पहले आयोजित एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है। सरकार का मानना है कि प्रस्तावित संशोधन कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाएगा और भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद करेगा। वहीं, विपक्ष इस विषय पर सरकार से अधिक जवाबदेही की मांग करता रहा है, जिसके कारण यह मुद्दा संसद के मानसून सत्र का प्रमुख राजनीतिक विषय बना हुआ है।
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