CG UCC News : छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी कवायद तेज कर दी है। प्रस्तावित कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए अलग-अलग वर्गों और समुदायों से सुझाव लिए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में मंगलवार, 1 सितंबर को रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में समान नागरिक संहिता समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखी। प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट संस्कृति, धार्मिक पहचान, आदिवासी परंपराओं और सामाजिक ताने-बाने के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव समिति के सामने रखे।
आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर
बैठक में सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी सामाजिक परंपराएं और रीति-रिवाज उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए UCC तैयार करते समय स्थानीय जनजातीय समाज की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। कंवर, गोंड, बैगा और उरांव सहित विभिन्न जनजातियों के प्रतिनिधियों ने मांग की कि उनकी रूढ़िगत प्रथाओं, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को प्रस्तावित कानून में उचित संरक्षण दिया जाए।
महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की मांग
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ममता साहू ने बैठक में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ सकारात्मक सामाजिक बदलाव और समय के साथ होने वाले आवश्यक परिवर्तन को भी UCC में जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार को और मजबूत करने वाले कानूनी प्रावधानों को भी प्रस्तावित संहिता में शामिल करने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि समान नागरिक संहिता में राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर भी चर्चा
ममता साहू ने छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन से जुड़े विषय को भी UCC के दायरे में अलग से रेखांकित करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि राज्य की सामाजिक परिस्थितियों और स्थानीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कानून का प्रारूप तैयार किया जाना चाहिए। बैठक में मौजूद विभिन्न प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने समुदायों से जुड़े सामाजिक और कानूनी विषयों पर समिति के सदस्यों के सामने सुझाव रखे।
महिलाओं को संपत्ति और वैवाहिक अधिकार देने पर जोर
छत्तीसगढ़ राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन ने भी बैठक में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने राज्य की समृद्ध लोककला और जनजातीय धरोहर को संरक्षित रखने की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने कहा कि विवाह और संपत्ति से जुड़े अधिकारों में समानता सुनिश्चित होने से समाज के अंतिम छोर पर खड़ी महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और आत्मविश्वास मिलेगा। UCC के तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, विरासत और लिव-इन संबंधों जैसे विषयों पर व्यापक विचार किया जा रहा है।
अनुच्छेद 44 के तहत चल रहा जनसंवाद
संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता की दिशा में प्रयास का उल्लेख है। इसी आधार पर समिति प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में व्यापक जनसंवाद कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा समान विधिक ढांचा तैयार करना है, जो धर्म और समुदाय के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों के लिए समान नियम निर्धारित कर सके। समिति जिला स्तर पर फील्ड स्टडी, प्रत्यक्ष बैठकों और ऑनलाइन माध्यमों से लोगों की राय जुटा रही है।
विवाह से गोद लेने तक विषयों पर अध्ययन
UCC समिति विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, विरासत और दत्तक ग्रहण जैसे संवेदनशील विषयों का अध्ययन कर रही है। इसके साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। समिति का प्रयास है कि प्रस्तावित कानून तैयार करने से पहले प्रदेश की सामाजिक विविधता और विभिन्न समुदायों की आवश्यकताओं को समझा जाए। 1 सितंबर की बैठक में भी इन्हीं मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
पांच सदस्यीय समिति कर रही है ड्राफ्ट तैयार
छत्तीसगढ़ सरकार ने UCC का प्रारूप तैयार करने के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति में सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह, एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है। समिति को 26 जून 2026 से काम करने की मंजूरी दी गई थी और अब वह विभिन्न सामाजिक, कानूनी तथा प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर रही है।
15 अक्टूबर तक जनता दे सकती है अपनी राय
छत्तीसगढ़ सरकार और UCC समिति ने आम नागरिकों समेत सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और राजनीतिक दलों से सुझाव मांगे हैं। लोग 15 अक्टूबर 2026 तक अपने विचार समिति तक पहुंचा सकते हैं। सुझाव ई-मेल, ऑनलाइन पोर्टल और डाक के माध्यम से भेजे जा सकते हैं। समिति इन सुझावों का अध्ययन करने के बाद प्रस्तावित UCC के प्रारूप में आवश्यक बिंदुओं को शामिल करेगी।
ऑनलाइन और डाक से भेज सकते हैं सुझाव
नागरिक अपने सुझाव ucc-chhattisgarh@cg.gov.in पर ई-मेल कर सकते हैं। ऑनलाइन सुझाव देने के लिए समिति के पोर्टल ucc.cgstate.gov.in का इस्तेमाल किया जा सकता है। डाक के माध्यम से सुझाव भेजने के लिए पता है—कार्यालय समान नागरिक संहिता समिति, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, कमरा नंबर-202, रायपुर, छत्तीसगढ़-492001। समिति का कहना है कि व्यापक जनभागीदारी से तैयार प्रारूप को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और जनहितैषी बनाने में मदद मिलेगी।
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