CG Weather Alert: प्रदेश में एक बार फिर मानसून की सक्रियता देखने को मिल रही है। भारतीय मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, छत्तीसगढ़ के दक्षिणी जिलों में आगामी 24 घंटों के भीतर भारी वर्षा हो सकती है। इससे निचले इलाकों में जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वहीं राज्य के अन्य हिस्सों में भी बादलों की आवाजाही के साथ रुक-रुक कर बारिश होने के आसार हैं।
मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार, बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोरबा जैसे दक्षिणी जिलों में भारी वर्षा की संभावना अधिक है। इन इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है। स्थानीय प्रशासन को स्थिति पर नजर रखने और आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में मानसून द्रोणिका रेखा फिरोजपुर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इसके साथ ही पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और उत्तर-पश्चिम खाड़ी क्षेत्र में 3.1 से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके प्रभाव से निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे वर्षा की तीव्रता और व्यापकता दोनों बढ़ सकती है।
एक अन्य द्रोणिका रेखा अरब सागर से होते हुए दक्षिण गुजरात, महाराष्ट्र, विदर्भ और तेलंगाना पार कर उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश तक फैली हुई है। यह सिस्टम लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर सक्रिय है, जिसके कारण छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में नमी आ रही है। इससे बारिश की स्थिति बनी हुई है और आने वाले दिनों में और भी अधिक सक्रियता देखी जा सकती है।
राजधानी रायपुर में बुधवार को दोपहर में झमाझम वर्षा हुई, जिससे लोगों को भीषण उमस से अस्थायी राहत मिली। लेकिन वर्षा के थमने के बाद वातावरण फिर से चिपचिपा हो गया और लोगों को पुनः असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। शाम को आसमान में काले बादलों की घनघोर मौजूदगी तो रही, लेकिन वर्षा नहीं हुई, जिससे लोगों में निराशा देखी गई।
बिलासपुर जिले में बीते कुछ दिनों से सामान्य से अधिक वर्षा हो चुकी है, जिससे जमीन में नमी की मात्रा बढ़ गई है। हालांकि, उमस ने अब तक राहत नहीं दी है और लोग लगातार भारीपन और असहजता महसूस कर रहे हैं। कृषि कार्यों के लिए यह मौसम लाभदायक हो सकता है, लेकिन नागरिकों के लिए यह परेशानी का कारण बन रहा है।
मौसम विभाग ने गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से दक्षिणी जिलों और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। लोगों को खुले मैदान, ऊंचे पेड़ या खुले छतों से दूर रहने की सख्त सलाह दी गई है।
मौसम की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को तैयार रहने को कहा गया है। नागरिकों से अपील की गई है कि मौसम विभाग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में राहत दल से संपर्क करें। स्कूल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थानों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 48 घंटे छत्तीसगढ़ के लिए मौसम की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहेंगे। विशेषकर दक्षिणी जिलों में अगले दो दिनों तक भारी से अत्यधिक भारी वर्षा संभव है। ऐसे में यात्रा, खेती और निर्माण कार्यों को लेकर सावधानी बरतना आवश्यक है।
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