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CGPSC scam: CBI ने टामन सिंह सोनवानी को बताया मास्टरमाइंड, 2000 पन्नों का पूरक चालान पेश

CGPSC scam: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी सफलता हासिल की है। सोमवार को स्पेशल कोर्ट में CBI ने 2000 पन्नों का पहला पूरक चालान पेश किया, जिसमें घोटाले के कई अहम खुलासे किए गए हैं। जांच एजेंसी ने CGPSC के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी को इस बड़े घोटाले का मास्टरमाइंड बताया है।

आरोपियों की सूची में प्रमुख नाम

CBI ने टामन सिंह सोनवानी के साथ-साथ आरती वासनिक, जीवन किशोर ध्रुव, निशा कोसले और दीपा आडिल को भी आरोपी बनाया है। आरोपियों की भूमिका विस्तार से बताई गई है, जिनमें परीक्षा के पेपर लीक कराने से लेकर लाभ पाने तक के सबूत और गवाह शामिल हैं। फिलहाल, सभी आरोपी न्यायिक रिमांड में जेल में बंद हैं। अब तक इस मामले में 12 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।

टामन सिंह सोनवानी का कांड

CBI के अनुसार, टामन ने परीक्षा का पेपर लीक कर उसे घर पर साहिल, नीतेश, निशा कोसले और दीपा आदिल को दिया। उल्लेखनीय है कि इन सबकी सरकारी सेवा में नियुक्ति हो चुकी है — दीपा जिला आबकारी अधिकारी, निशा डिप्टी कलेक्टर, साहिल डीएसपी और नीतेश डिप्टी कलेक्टर पद पर हैं।

पेपर लीक की साजिश में ललित गणवीर का नाम

टामन के अलावा, परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने भी पेपर लीक में भूमिका निभाई। उसने पेपर बजरंग पावर एंड इस्पात के डायरेक्टर श्रवण गोयल को दिया। श्रवण के बेटे शशांक और बहू भूमिका ने इस तैयारी में सहयोग किया, जिन दोनों को भी डिप्टी कलेक्टर पद मिला।

आरती वासनिक की भूमिका भी उजागर

CGPSC 2021 परीक्षा के प्रिलिम्स और मेन्स दोनों सेट लीक हुए थे। इस पूरी साजिश में परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर और सचिव जीवन किशोर ध्रुव शामिल थे।पर्चे छपवाने का ठेका कोलकाता की कंपनी मेसर्स एकेडी प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। कंपनी ने दो सेट प्रिलिम्स के पर्चे तैयार किए, जिनमें सामान्य अध्ययन और छत्तीसगढ़ से संबंधित प्रश्न थे।

पेपर की चोरी और कॉपी बनवाने की बात

जांच के दौरान सामने आया कि आरती वासनिक ने प्रिंटिंग कंपनी के मालिक अरुण द्विवेदी को फोन कर पेपर रिव्यू के लिए बुलाया। जनवरी 2021 में आरती को सात सेट प्रश्न पत्र महेश दास के माध्यम से दिए गए। आरती ने इन्हें टामन और ललित के साथ मिलकर खोलकर कॉपी कराया, फिर लिफाफा सील कर वापस प्रिंटिंग के लिए भेज दिया गया।

सीबीआई की जांच का अब तक का हाल

CBI ने मामले की गहराई से जांच की है और आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए हैं। अब 2000 पन्नों के पूरक चालान के आधार पर कोर्ट में आरोप पत्र दायर किया गया है, जिससे घोटाले का पूरा खेल सामने आ गया है।CGPSC घोटाला छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। इस मामले में उच्च स्तरीय साजिश और सरकारी पदों की घोटालेबाजी उजागर हुई है। जांच एजेंसी की लगातार कार्रवाई से उम्मीद है कि दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।

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