Chandigarh Mayor Election
Chandigarh Mayor Election: चंडीगढ़ मेयर चुनाव से ठीक पहले विपक्षी एकजुटता को बड़ा झटका लगा है। आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने इस बार अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है। ‘आप’ के मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं है और न ही भविष्य में ऐसी कोई संभावना है। ढांडा ने कांग्रेस और भाजपा दोनों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इन दोनों दलों ने मिलकर देश को लूटा है। उन्होंने दावा किया कि केवल आम आदमी पार्टी ही जनता के संघर्ष की असली आवाज है, जो इन दोनों भ्रष्ट ताकतों के खिलाफ मजबूती से खड़ी है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस में हर नेता मुख्यमंत्री बनने की होड़ में आपस में ही लड़ रहा है, उन्हें जनता की परवाह नहीं है। वहीं, भगवंत मान ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के भीतर सेवा का भाव पूरी तरह खत्म हो चुका है; वे केवल ‘मेवा’ (सत्ता का सुख) खाना चाहते हैं। पंजाब कांग्रेस में जारी इस कलह को ‘आप’ ने अपनी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाते हुए खुद को जनता के सामने एक स्थिर विकल्प के रूप में पेश किया है।
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अलग-अलग उम्मीदवार उतारने का सीधा और सबसे बड़ा फायदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिलने वाला है। चंडीगढ़ नगर निगम के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा का पलड़ा काफी भारी दिखाई देता है। कुल 35 पार्षदों में से भाजपा के पास 18 पार्षद हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के 11 और कांग्रेस के मात्र 6 पार्षद हैं। विपक्ष के वोट बंटने के कारण अब मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर—तीनों महत्वपूर्ण पदों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। विपक्षी एकजुटता के अभाव ने भाजपा के लिए जीत की राह को निष्कंटक बना दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चंडीगढ़ में गठबंधन टूटने के पीछे की असली वजह आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वे चंडीगढ़ में साथ चुनाव लड़ते, तो पंजाब में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ना उनके लिए नैतिक और राजनीतिक रूप से कठिन हो जाता। दोनों दल यह भली-भांति जानते हैं कि अलग लड़ने पर उनकी हार निश्चित है, फिर भी वे अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और भविष्य की चुनावी जमीन को बचाने के लिए हार का जोखिम उठाने को तैयार हैं।
विवादों और बयानों के बीच चुनावी प्रक्रिया भी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के पार्षद रामचंद्र यादव ने डिप्टी मेयर पद के लिए निर्दलीय (आजाद) उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल कर हलचल बढ़ा दी है। इस कदम को ‘आप’ की अपनी ताकत दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, संख्या बल भाजपा के पक्ष में है, लेकिन विपक्षी दलों के उम्मीदवार मैदान में उतरकर यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अंतिम समय तक मैदान छोड़ने को तैयार नहीं हैं। फिलहाल, चंडीगढ़ की राजनीति में शह-मात का खेल अपने चरम पर है।
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