Timothy Initiative Network
Timothy Initiative Network : छत्तीसगढ़ में कथित अवैध धर्मांतरण, विदेशी फंडिंग और ‘चर्च-प्लांटिंग’ के बड़े सिंडिकेट को लेकर जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया जांच में विदेशी डेबिट कार्डों के जरिए करोड़ों रुपये भारत लाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस पूरे प्रकरण में अब अंतरराष्ट्रीय मिशनरी संगठन ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (TTI) का नाम प्रमुखता से उभरकर सामने आया है, जिसके नेटवर्क की पड़ताल अब बस्तर से लेकर राजनांदगांव तक की जा रही है।
छत्तीसगढ़ में इस नेटवर्क की सक्रियता के पुख्ता संकेत तब मिले जब ईडी की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया। जांच के अनुसार, नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच विदेशी डेबिट कार्ड्स का उपयोग कर करीब 95 करोड़ रुपये भारत लाए गए। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस राशि में से लगभग 6.5 करोड़ रुपये केवल बस्तर और धमतरी जैसे संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से निकाले गए। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस भारी-भरकम रकम का उपयोग गुप्त रूप से चर्च स्थापित करने, स्थानीय पादरियों को फंड देने और धर्म प्रचार गतिविधियों के विस्तार में किया गया है।
द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI) एक वैश्विक ईसाई मिशनरी संगठन है, जिसका घोषित लक्ष्य दुनिया के हर गांव में चर्च स्थापित करना है। संगठन के अपने आंकड़ों के मुताबिक, साल 2007 से अब तक उसने 50 देशों में 2.68 लाख से ज्यादा चर्च बनाए हैं। भारत में हालांकि इसकी आधिकारिक संख्या सार्वजनिक नहीं है, लेकिन विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार उत्तर भारत में 3,000 और दक्षिण भारत में 7,000 से अधिक ‘हाउस चर्च’ इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। एजेंसियां अब यह देख रही हैं कि क्या छत्तीसगढ़ में सक्रिय लोकल पास्टर इसी ट्रेनिंग मॉड्यूल का हिस्सा हैं।
टीटीआई का कार्य करने का तरीका काफी व्यवस्थित और बहुस्तरीय है। यह मॉडल ‘बाइबल’ की एक आयत पर आधारित बताया जाता है, जिसमें ‘पॉल’ (मास्टर ट्रेनर), ‘टिमोथी’ (चर्च प्लांटर) और ‘टाइटस’ (शिष्य) की एक श्रृंखला तैयार की जाती है। यह नेटवर्क गांवों तक पहुंचकर छोटे-छोटे ‘हाउस चर्च’ और प्रार्थना समूहों के माध्यम से अपना विस्तार करता है। एजेंसियां अब बैंक खातों, सोशल मीडिया संपर्कों और स्थानीय पास्टरों के ट्रेनिंग मॉड्यूल की कड़ियों को जोड़कर इस बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश करने में जुटी हैं।
इस खुलासे के बाद प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने इसे केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। वहीं, भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार इसीलिए ईडी की जांच का विरोध करती थी क्योंकि ग्रामीण इलाकों में विदेशी फंडिंग से खेल चल रहा था। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को नकारते हुए पलटवार किया है कि ये तमाम वित्तीय लेनदेन भाजपा शासन के दौरान ही शुरू हुए हैं।
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में धर्मांतरण के मुद्दे पर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। जशपुर, सरगुजा, बस्तर, नारायणपुर और राजनांदगांव जैसे इलाकों में अक्सर हिंदू संगठनों और मिशनरी समूहों के बीच टकराव की खबरें आती रहती हैं। बस्तर में हाल ही में एक पादरी की पिटाई और हर रविवार को होने वाले प्रेयर ग्रुप्स पर विवाद इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इन क्षेत्रों में आदिवासियों के बीच ‘लोकल पास्टर नेटवर्क’ के जरिए किए जा रहे प्रचार ने सामाजिक समरसता के सामने नई चुनौतियां पेश कर दी हैं।
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