Chandra Grahan 2026
Chandra Grahan 2026: साल 2026 की शुरुआत खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण 03 मार्च 2026 को फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर लगने जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह इस साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा, जिसकी कुल अवधि 03 घंटे 27 मिनट की होगी। धार्मिक मान्यताओं में चंद्र ग्रहण को एक विशेष घटना माना जाता है, जिसका सीधा प्रभाव मानव जीवन और प्रकृति पर पड़ता है। यह ग्रहण न केवल खगोल प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी इसका गहरा महत्व है।
यह महत्वपूर्ण खगोलीय घटना सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस राशि और नक्षत्र में ग्रहण लगता है, उस राशि के जातकों पर इसका विशेष प्रभाव पड़ता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान (Visible) होगा, इसलिए इसके धार्मिक और ज्योतिषीय नियम देश भर में पूरी तरह से प्रभावी रहेंगे। विद्वानों का मानना है कि सिंह राशि के जातकों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ‘सूतक काल’ को एक अशुद्ध और अशुभ समय माना जाता है। यह वह अवधि है जो ग्रहण के वास्तविक स्पर्श से कुछ समय पूर्व ही प्रारंभ हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दौरान पृथ्वी का वातावरण संवेदनशील हो जाता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ सकता है। यही कारण है कि सूतक काल के दौरान सतर्कता बरतने और ईश्वर का ध्यान करने की सलाह दी जाती है ताकि प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सके।
सूतक काल की गणना ग्रहण के प्रकार पर निर्भर करती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले शुरू होता है, जबकि चंद्र ग्रहण का सूतक 3 प्रहर यानी 09 घंटे पहले शुरू हो जाता है। 03 मार्च को होने वाले ग्रहण के लिए सूतक काल की शुरुआत सुबह 09 बजकर 06 मिनट से हो जाएगी, जो ग्रहण की समाप्ति यानी शाम 06 बजकर 47 मिनट तक प्रभावी रहेगा। ग्रहण समाप्त होते ही सूतक भी स्वतः समाप्त माना जाता है, जिसके बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया की जाती है।
सूतक काल प्रभावी होने के बाद कई कार्यों पर पूर्णतः रोक लग जाती है:
वर्जित कार्य: इस अवधि में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश नहीं किए जाते।
पूजा-पाठ: मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। देवी-देवताओं की मूर्तियों और तुलसी के पौधे को स्पर्श करना वर्जित होता है।
खान-पान: शास्त्रों के अनुसार, इस समय भोजन बनाना और ग्रहण करना अशुभ माना जाता है। हालांकि, वृद्धों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों के लिए इसमें छूट के प्रावधान हैं।
गर्भवती महिलाएं: सूतक शुरू होने के बाद गर्भवती महिलाओं को घर के भीतर रहने की सलाह दी जाती है और उन्हें नुकीली वस्तुओं के प्रयोग से बचना चाहिए।
नीचे दी गई तालिका से आप ग्रहण और सूतक के समय को स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं:
| घटना | समय (भारतीय समयानुसार) |
| सूतक काल प्रारंभ | सुबह 09:06 बजे |
| चंद्र ग्रहण स्पर्श (शुरुआत) | दोपहर 03:20 बजे |
| ग्रहण की कुल अवधि | 03 घंटे 27 मिनट |
| ग्रहण समाप्त (मोक्ष) | शाम 06:47 बजे |
Iran-US Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे कूटनीतिक गतिरोध को…
Pawan Khera Bail : भारतीय राजनीति के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है।…
LPG Price Hike: मई महीने की शुरुआत के साथ ही आम आदमी की रसोई पर…
Health Tips: ड्राई फ्रूट्स की दुनिया में मुनक्का एक ऐसा नाम है, जिसे आयुर्वेद में…
India-Bangladesh Row: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की हालिया टिप्पणियों ने भारत और बांग्लादेश…
Silent Killer: "मैं सालों से सिगरेट पी रहा हूं और मुझे आज तक कुछ नहीं…
This website uses cookies.