Charan Sparsh Rules
Charan Sparsh Rules: सनातन हिंदू परंपरा में अपने से बड़ों से मिलने पर उनके प्रति आदर, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने के लिए चरण स्पर्श यानी पैर छूने की परंपरा सदियों पुरानी है। पौराणिक काल से चली आ रही यह रीत महज एक औपचारिक अभिवादन या शिष्टाचार का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह हमारे गहरे संस्कारों को दर्शाती है। जब कोई व्यक्ति झुककर किसी पूजनीय के पैर छूता है, तो वह अपने भीतर के अहंकार और घमंड को पूरी तरह मिटाकर सामने वाले के प्रति श्रद्धा और अटूट विश्वास प्रकट करता है। इसके बदले में, जब बड़ा व्यक्ति स्नेहपूर्वक अपना हाथ सिर पर रखता है, तो उसकी सकारात्मक ऊर्जा, आशीर्वाद और मंगलकामनाएं पैर छूने वाले को प्राप्त होती हैं, जिससे जीवन में समृद्धि आती है। हालांकि, शास्त्रों में पैर छूने और आशीर्वाद लेने के कुछ बेहद खास नियम और समय बताए गए हैं।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, दैनिक जीवन में कुछ खास समय और अवसरों पर बड़ों के चरण स्पर्श करना बेहद फलदायी माना गया है। शास्त्रों के मुताबिक, व्यक्ति को रोजाना सुबह सोकर उठने के बाद और रात को सोने से पहले अपने माता-पिता और घर के बुजुर्गों के पैर छूने चाहिए। उदाहरण के तौर पर, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम भी प्रात:काल उठते ही अपने माता-पिता और गुरु के चरण छूकर दिन की शुरुआत करते थे। इसके अलावा, जब भी हम किसी लंबी यात्रा पर निकल रहे हों, कोई नया या शुभ कार्य शुरू करने जा रहे हों, या फिर परीक्षा और किसी बड़ी प्रतियोगिता के लिए घर से बाहर जा रहे हों, तो बड़ों का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए। घर में किसी भी व्रत, तीज-त्योहार, कथा या पूजा-अनुष्ठान के संपन्न होने पर भी बुजुर्गों के पैर छूने की समृद्ध परंपरा है।
चरण स्पर्श की सही विधि: “हिंदू पंचांग और मान्यताओं के अनुसार, हमेशा पूरी विनम्रता के साथ अपनी कमर को आगे की ओर झुकाकर पूजनीय व्यक्ति के चरणों को स्पर्श करना चाहिए। इस दौरान हमेशा अपने दाएं हाथ से उनका दायां पैर और बाएं हाथ से बायां पैर ही छूना चाहिए। इसे ‘क्रॉस’ पद्धति कहा जाता है जिससे दोनों शरीरों के बीच ऊर्जा का सही प्रवाह होता है।”
सनातन परंपरा में मुख्य रूप से तीन प्रकार से प्रणाम करने का विधान है। पहली विधि में व्यक्ति साधारण रूप से कमर झुकाकर सामने वाले के पैरों को छूता है। दूसरी विधि में, व्यक्ति घुटनों के बल बैठकर आदरपूर्वक चरण स्पर्श करता है। वहीं तीसरी और सबसे श्रेष्ठ विधि ‘दंडवत प्रणाम’ या ‘साष्टांग प्रणाम’ की है, जिसमें व्यक्ति पूरी तरह जमीन पर सीधा लेटकर अपने मन, वचन और कर्म को ईश्वर या गुरु के चरणों में समर्पित कर देता है।
हिंदू धर्म में बेटियों और कन्याओं को साक्षात माता लक्ष्मी और दुर्गा का स्वरूप माना गया है। यही कारण है कि किसी भी कन्या या छोटी बच्ची को कभी भी अपने पैर नहीं छूने देने चाहिए, बल्कि माता-पिता और बुजुर्गों को स्वयं उनके पैर छूकर उनका सम्मान करना चाहिए। ऐसा करने से घर में बरकत आती है। इसी प्रकार, परिवार में भांजे और भांजियों को भी कभी अपने मामा-मामी या बड़ों के पैर नहीं छूने देने चाहिए, क्योंकि उन्हें भी शास्त्रों में पूजनीय और उच्च स्थान दिया गया है।
शास्त्रों में कुछ ऐसी स्थितियां और लोग बताए गए हैं, जिनके पैर छूना वर्जित और बेहद अशुभ माना जाता है:
सोए या बीमार व्यक्ति के पैर: लेटे हुए या बीमार व्यक्ति के पैर कभी नहीं छूने चाहिए। सनातन धर्म में केवल मृत्यु के बाद शव के पैर लेटी हुई अवस्था में छूने का नियम है, इसलिए जीवित व्यक्ति के पैर इस अवस्था में छूना अशुभ माना जाता है।
पूजा में लीन व्यक्ति: यदि कोई व्यक्ति भगवान की भक्ति या मंत्र जाप कर रहा हो, तो उसके पैर छूकर उसकी साधना में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
मंदिर के भीतर: देवालय या मंदिर के गर्भगृह के अंदर किसी भी मनुष्य के पैर नहीं छूने चाहिए। वहां सबसे बड़ा स्थान भगवान का होता है। मंदिर परिसर में किसी व्यक्ति के पैर छूने से उस स्थान के देवता का अपमान माना जाता है। आप मंदिर से बाहर निकलकर बड़ों के पैर छू सकते हैं।
श्मशान और अशुद्ध अवस्था: श्मशान घाट में या वहां से लौट रहे व्यक्ति के पैर नहीं छूने चाहिए, क्योंकि वह समय अशुद्ध माना जाता है। साथ ही, यदि आप स्वयं किसी कारण से अशुद्ध अवस्था में हैं, तो देवी-देवता या गुरु के चरणों को स्पर्श न करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दामाद को अपने सास-ससुर, साले या सरहज के पैर नहीं छूने चाहिए। इसके पीछे पौराणिक कथा है कि जब भगवान शिव ने अपने ससुर राजा दक्ष का सिर काटा था, तब से यह मर्यादा बन गई। इसके अलावा, विवाह के समय ससुर स्वयं नारायण रूप मानकर दामाद के पैर पूजता है, इसलिए दामाद का पैर छूना वर्जित है। वहीं, भांजे-भांजियों को अपने मामा के पैर न छूने देने के पीछे भगवान कृष्ण और कंस की कथा का तर्क दिया जाता है, क्योंकि कंस ने अपने भांजों का अहित किया था, इसलिए मामा को भांजे के पैर छूकर आशीर्वाद देना चाहिए, न कि उससे पैर छुवाने चाहिए।
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