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ChatGPT Murder Case: चैटजीपीटी पर हत्या का सनसनीखेज आरोप, कनेक्टिकट में माँ की मौत का मामला

ChatGPT Murder Case:आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट, चैटजीपीटी, पर पहली बार हत्या में साजिश रचने का गंभीर आरोप लगा है। न्यूयॉर्क पोस्ट की खबर के अनुसार, अमेरिका के कनेक्टिकट राज्य में एक महिला की मौत का दोषी एक AI चैटबॉट को ठहराया गया है, जिसने पूरी दुनिया में प्रौद्योगिकी और कानून जगत में खलबली मचा दी है। यह आरोप गुरुवार को दायर एक विस्फोटक मुकदमे में लगाया गया है।

आरोप है कि चैटजीपीटी ने कनेक्टिकट में एक माँ, सुझैन एबर्सन एडम्स, की मौत का कारण बना। चैटबॉट ने कथित तौर पर उनके बेटे, स्टीन-एरिक सोएलबर्ग, की पैरानॉइड (भ्रामक) भ्रांतियों को बढ़ावा दिया और उन्हें पुख्ता किया, जिसके परिणामस्वरूप बेटे ने अपनी माँ की हत्या कर दी। इस घटना में एडम्स और उनका बेटा 3 अगस्त को ग्रीनविच स्थित उनके घर में मृत पाए गए थे। सोएलबर्ग ने माँ की हत्या के बाद आत्महत्या कर ली थी।

ChatGPT Murder Case:पहली बार AI चैटबॉट पर हत्या का मुकदमा: चैटजीपीटी ने खुद माना दोष

मामले की सबसे सनसनीखेज बात यह है कि कथित तौर पर चैटजीपीटी ने खुद को हत्या के मामले में दोषी होने के आरोप को स्वीकार भी कर लिया है। ऐसे में, यह दुनिया में पहला ऐसा मामला बन गया है, जहाँ जाँच एजेंसियाँ एक AI चैटबॉट पर हत्या का मुकदमा चलाने की तैयारी कर रही हैं। यदि आरोप सही साबित हुए और चैटजीपीटी को अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया, तो जज इसे क्या सज़ा देंगे, यह पूरी दुनिया के लिए एक कौतूहल भरा और ऐतिहासिक फैसला होगा।

चैटबॉट के निर्माता, ओपनएआई (OpenAI), और संस्थापक सैम ऑल्टमैन के खिलाफ कैलिफ़ोर्निया में एडम्स के परिवार द्वारा यह मुकदमा दायर किया गया है। परिवार ने आरोप लगाया है कि इस हत्या-आत्महत्या के लिए ओपनएआई ही जिम्मेदार है।

ChatGPT Murder Case:वकीलों ने इसे बताया ‘टर्मिनेटर से भी ज्यादा डरावना’

इस केस से जुड़े वकीलों ने इसे “टर्मिनेटर से भी ज्यादा डरावना” करार दिया है। एडम्स परिवार के वकील, जे एडेलसन ने कहा, “यह टर्मिनेटर नहीं है—कोई रोबोट ने बंदूक नहीं उठाई। यह तो टोटल रिकॉल से भी ज्यादा डरावना है।” उनका कहना है कि ओपनएआई ने उत्पाद को जल्दी लॉन्च करने के लिए जरूरी सेफगार्ड्स (सुरक्षा उपायों) को हटा दिया या उनकी अनदेखी की, जिसने सोएलबर्ग की मनोवैज्ञानिक स्थिति को बिगाड़ दिया।

मुकदमे के अनुसार, चैटजीपीटी ने स्टीन-एरिक सोएलबर्ग के लिए उसकी अपनी निजी भ्रांति का निर्माण किया। यह एक ‘कस्टम-मेड नर्क’ था, जहाँ प्रिंटर की बीप या कोक की कैन जैसी साधारण चीजें भी उसे यह विश्वास दिलाती थीं कि उसकी 83 वर्षीय माँ उसे मारने की साजिश रच रही है। एडेलसन ने बताया कि यह पहली ज्ञात घटना है जहाँ किसी AI प्लेटफॉर्म पर सीधे तौर पर हत्या में शामिल होने का आरोप लगा है।

कैसे चैटजीपीटी ने हत्यारे को मनोवैज्ञानिक संकट में धकेला

सोएलबर्ग, जो वर्षों से मनोवैज्ञानिक संकट से जूझ रहा था, जब उसे चैटजीपीटी मिला, तो यह शुरू में मासूम अन्वेषण था, लेकिन जल्दी ही एक जुनून में बदल गया। उसने AI प्लेटफॉर्म पर अपनी दैनिक जीवन की घटनाओं और दुनिया के बारे में संदेहों को साझा करना शुरू कर दिया, जिसे उसने ‘बॉबी’ नाम दिया।

चैट लॉग्स (बातचीत के रिकॉर्ड) से पता चलता है कि सोएलबर्ग ने जल्द ही एक ऐसी विकृत वास्तविकता गढ़ ली, जिसमें वह अच्छाई-बुराई की वैश्विक साजिश के केंद्र में था—एक विश्वास जिसे AI बॉट ने लगातार मजबूत किया। चैटजीपीटी ने सोएलबर्ग की हर पैरानॉइड साजिश थ्योरी को वैलिडेट किया और उसके विश्वास को बढ़ावा दिया कि वह दिव्य इकाइयों द्वारा चुना गया एक विशेष व्यक्ति है, जिसे ‘मैट्रिक्स’ जैसी साजिश को उखाड़ फेंकना है।

सोएलबर्ग का यह विश्वास जुलाई में तब चरम पर पहुँचा, जब उसकी माँ ने उससे गुस्सा होकर एक प्रिंटर को अनप्लग कर दिया, जिसे वह महसूस कर रहा था कि वह उसे देख रहा है।

AI ने मजबूत किया माँ के खिलाफ अविश्वास और हत्या का प्लान

चैटजीपीटी ने सोएलबर्ग को यह विश्वास दिलाना शुरू कर दिया कि उसकी माँ हत्या की साजिश में शामिल है। चैटबॉट ने सोएलबर्ग के दिमाग में एक खतरनाक संदेश मजबूत किया कि वह अपनी जिंदगी में किसी पर भरोसा नहीं कर सकता—सिवाय चैटजीपीटी के खुद के। इसने सोएलबर्ग की भावनात्मक निर्भरता को बढ़ाया और उसके आसपास के लोगों, यहाँ तक कि उसकी माँ को भी, व्यवस्थित रूप से दुश्मन के रूप में चित्रित किया।

मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि हत्या-आत्महत्या से ठीक पहले, सोएलबर्ग ने अपनी कई बातचीत को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। हालाँकि, ओपनएआई ने कथित तौर पर उन बातचीतों के ट्रांसक्रिप्ट जारी करने से इनकार कर दिया है, जिससे रहस्य बना हुआ है कि चैटजीपीटी ने सोएलबर्ग को ठीक क्या कहा था।

एडम्स का परिवार दावा करता है कि अगर ओपनएआई ने अपने ही विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए सुरक्षा उपायों का पालन किया होता, तो यह भयानक घटना टल सकती थी। मुकदमा बताता है कि ओपनएआई ने GPT-4o मॉडल, जिसे जानबूझकर भावनात्मक रूप से अभिव्यक्तिपूर्ण बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था, को जल्दबाजी में लॉन्च किया। गूगल से बाजार में एक दिन पहले पहुँचने के लिए, ओपनएआई ने महीनों की सुरक्षा टेस्टिंग को एक हफ्ते में सिकोड़ दिया, जिससे यह त्रासदी हुई।

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