Manipur Protest
Manipur Protest : मणिपुर में शांति बहाली की तमाम कोशिशों के बीच एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। शनिवार को राजधानी इम्फाल की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। ‘मणिपुर की अखंडता पर समन्वय समिति’ (COCOMI) के बैनर तले आयोजित इस विशाल रैली ने राज्य प्रशासन की नींद उड़ा दी है। हजारों की संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई। यह समिति राज्य की अखंडता की रक्षा और मेइती समुदाय के अधिकारों के लिए लंबे समय से सक्रिय है।
रैली की शुरुआत शांतिपूर्ण तरीके से हुई थी, लेकिन जैसे ही प्रदर्शनकारियों का जत्था मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर मुड़ा, स्थिति अनियंत्रित हो गई। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री को 6 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपना था। हालांकि, सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई, जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया। राहत की बात यह रही कि इस झड़प में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना अब तक नहीं मिली है।
शनिवार दोपहर 1 बजे जब रैली शुरू हुई, तो इम्फाल के विभिन्न हिस्सों से लोगों का आना शुरू हुआ। लैमलोंग बाजार, लम्बोई खोंगनांगखोंग, काकवा केटल, तिद्दिम ग्राउंड और ओरिएंटल कॉलेज जैसे प्रमुख स्थानों से हजारों की संख्या में मेइती समुदाय के लोग इकट्ठा हुए। इनके अलावा केशमथोंग, वांगोई और खांगेमबल्ली से भी बड़ी तादाद में पुरुष और महिलाएं बैनर और पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “मणिपुर की अखंडता से समझौता नहीं” जैसे नारों वाली तख्तियां थीं। लोगों का कहना था कि वे अब और इंतजार नहीं कर सकते और अपनी बात सीधे सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
COCOMI के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सरकार के सामने कुछ बेहद महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इन मांगों में प्रमुख रूप से मणिपुर में जारी हिंसा को तुरंत रोकना और सामान्य जनजीवन (Normal Life) बहाल करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य में रहने वाले प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके अलावा, उन्होंने हिंसा के लिए जिम्मेदार तत्वों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने, स्थानीय लोगों की जमीन को सुरक्षित करने और बाहरी लोगों द्वारा जमीन कब्जाने पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों की भीड़ को रोकने के लिए पूरे इम्फाल में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जब भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की, तभी पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बनी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन एहतियातन चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती कर दी गई है। सोशल मीडिया और संवेदनशील इलाकों पर ड्रोन के जरिए नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या नई हिंसा को रोका जा सके। प्रशासन का कहना है कि वे ज्ञापन स्वीकार करने और शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।
इस रैली ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि मणिपुर में जमीनी स्तर पर असंतोष अभी भी बरकरार है। महीनों से जारी अशांति के कारण लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है। शनिवार की इस घटना ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है कि वे जल्द से जल्द कोई ठोस समाधान निकालें। आम जनता की सुरक्षा और उनकी जमीन के अधिकारों को लेकर उठ रहे ये सवाल मणिपुर की आने वाली राजनीति और सामाजिक ताने-बाने के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं। फिलहाल, इम्फाल में शांति तो है, लेकिन यह शांति किसी बड़े तूफान से पहले की खामोशी जैसी महसूस हो रही है।
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