CG Budget Session
CG Budget Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को रसोई गैस (LPG) सिलेंडर की भारी किल्लत और कालाबाजारी को लेकर जबरदस्त गहमागहमी देखी गई। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रदेश में गहराते ईंधन संकट पर स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग की, जिसे सभापति द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद सदन में जमकर नारेबाजी हुई। इस हंगामे के परिणामस्वरूप सदन की कार्यवाही को न केवल स्थगित करना पड़ा, बल्कि नियमों के उल्लंघन के चलते कांग्रेस के 30 विधायकों को कुछ समय के लिए निलंबित भी किया गया।
विधानसभा की कार्यवाही जैसे ही शून्यकाल तक पहुँची, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने ईरान-इजराइल युद्ध के कारण उत्पन्न वैश्विक परिस्थितियों और उसके छत्तीसगढ़ पर पड़ रहे प्रभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि युद्ध के चलते आपूर्ति बाधित होने से पूरे प्रदेश में रसोई गैस की भारी कमी हो गई है। महंत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने पहले आश्वासन दिया था कि राज्य में किसी वस्तु की कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन अगले ही दिन कीमतों में भारी इजाफा कर दिया गया। विपक्ष ने इस विषय पर सदन की सभी सामान्य कार्यवाहियां रोककर तत्काल चर्चा (Adjournment Motion) की मांग की।
जब सभापति ने स्थगन प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया, तो कांग्रेस विधायक दल ने सदन के गर्भगृह में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति अनियंत्रित होते देख सभापति ने नियमों का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित 30 सदस्यों को सदन से निलंबित करने की घोषणा कर दी। हालांकि, सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए कुछ ही समय बाद इस निलंबन को रद्द कर दिया गया, जिससे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हो सकी।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चर्चा के दौरान बेहद गंभीर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर छत्तीसगढ़ के आम जनजीवन और व्यवसाय पर पड़ रहा है। बघेल ने दावा किया कि वाणिज्यिक गैस (Commercial LPG) की आपूर्ति रुकने से बड़े शहरों में लगभग 50 प्रतिशत होटलों ने अपना काम बंद कर दिया है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो शादियों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में भोजन की व्यवस्था ठप हो जाएगी, जिससे जनता में भारी आक्रोश फैलेगा।
सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने दलील दी कि रसोई गैस केंद्र का विषय है और राज्य सरकार का इसमें सीधा हस्तक्षेप नहीं है। इस पर पलटवार करते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि भले ही गैस आपूर्ति राज्य का विषय न हो, लेकिन प्रदेश के भीतर हो रही कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकना पूरी तरह से राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह घरेलू और वाणिज्यिक सिलेंडरों के वर्तमान स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक करे और यह बताए कि कालाबाजारी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
सदन की कार्यवाही 5 मिनट के स्थगन के बाद जब दोबारा शुरू हुई, तब नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 36 लाख से अधिक गैस उपभोक्ता वर्तमान में सिलेंडर के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह केवल केंद्र का मामला बताकर पल्ला न झाड़े, बल्कि जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दे ताकि आम आदमी को निर्धारित कीमतों पर गैस उपलब्ध हो सके। विपक्ष ने पेट्रोलियम पदार्थों की कमी की भी जांच की मांग की.
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