CG Assembly News : छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के समापन के दौरान सदन में महिला सुरक्षा का मुद्दा पूरी तरह छाया रहा। सत्र के अंतिम 10 मिनटों में इस विषय को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच भारी हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया और प्रदेश के सभी जिलों में अनिवार्य रूप से महिला थाने स्थापित करने की पुरजोर मांग उठाई। विधायक का तर्क था कि वर्तमान में राज्य के केवल 13 जिलों में ही महिला पुलिस थाने क्रियाशील हैं। ऐसे में, शेष जिलों की पीड़ित महिलाओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने और न्याय पाने के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

संगीता सिन्हा ने मांगी अपराधों का विस्तृत ब्योरा
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक संगीता सिन्हा ने सरकार से जनवरी 2023 से लेकर जून 2026 तक की अवधि के दौरान राज्य में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के साथ हुई दुष्कर्म, छेड़छाड़, मारपीट और हत्या की घटनाओं की विस्तृत जानकारी तलब की। उन्होंने सदन में जोर देकर कहा कि यदि प्रत्येक जिले में महिला थाने खोले जाते हैं, तो इससे न केवल अपराधों की रिपोर्टिंग आसान होगी, बल्कि पीड़ित महिलाओं को त्वरित सहायता भी उपलब्ध हो सकेगी। महिला थाने न होने से रिपोर्टिंग की प्रक्रिया जटिल हो जाती है, जिससे अपराधी बेखौफ होते हैं।

गृहमंत्री विजय शर्मा ने सुरक्षा का दिया भरोसा
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा और उनके सम्मान को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध और गंभीर है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले बजट में 4 से 5 नए स्थानों पर महिला थानों की शुरुआत की है। साथ ही, उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि आने वाले बजट में शेष बचे जिलों में भी महिला थाने खोलने का प्रस्ताव प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाएगा।
अपराध के आंकड़ों पर घमासान और विपक्षी विरोध
सदन के भीतर अपराधों के आंकड़ों को लेकर भी तीखी बहस हुई। गृहमंत्री विजय शर्मा ने वर्ष 2021 से लेकर जून 2026 तक के आंकड़े सदन में प्रस्तुत किए और यह दावा किया कि पिछली सरकार के कार्यकाल की तुलना में वर्तमान सरकार के समय में महिला अपराधों में कमी आई है। हालांकि, गृहमंत्री के इस दावे से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। कांग्रेस विधायकों ने विशेष रूप से नाबालिग बच्चियों के साथ हुई दुष्कर्म और हत्या की वीभत्स घटनाओं को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर विपक्ष के उग्र तेवरों के चलते विधानसभा में भारी शोर-शराबा और हंगामे की स्थिति निर्मित हो गई, जिसके कारण कार्यवाही बाधित रही।
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