Chhattisgarh BJP: मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले में भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता दुर्गाशंकर मिश्रा को छह साल के लिए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। उन पर लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने और संगठन के कार्यक्रमों तथा बैठकों को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए थे। यह कार्रवाई प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंहदेव के निर्देश पर की गई है।
प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कंडेय ने जारी किया आदेश
भाजपा छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव के निर्देश के बाद प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कंडेय ने दुर्गाशंकर मिश्रा के निष्कासन का आदेश जारी किया। आदेश के मुताबिक, उनके खिलाफ लगातार संगठन विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने की शिकायतें सामने आ रही थीं। पार्टी नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पहले उनसे स्पष्टीकरण मांगा और जवाब मिलने के बाद निष्कासन का निर्णय लिया। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
विधायक रेणुका सिंह के करीबी माने जाते हैं मिश्रा
दुर्गाशंकर मिश्रा को भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह का करीबी माना जाता है। वह वर्तमान में भरतपुर ब्लॉक में विधायक प्रतिनिधि की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इससे पहले भी वह संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। उनके निष्कासन से स्थानीय भाजपा की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के इस फैसले को संगठन में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भाजपा के कद्दावर नेताओं में रही है पहचान
MCB जिले में दुर्गाशंकर मिश्रा की पहचान एक प्रभावशाली भाजपा नेता के तौर पर रही है। वह पूर्व में जनपद उपाध्यक्ष और भाजपा जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने के कारण क्षेत्र में उनका राजनीतिक प्रभाव माना जाता रहा है। ऐसे में पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासन को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
कार्यकर्ताओं को परेशान करने के लगाए गए आरोप
दुर्गाशंकर मिश्रा पर क्षेत्र के कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर परेशान करने और पार्टी की बैठकों में बार-बार व्यवधान पैदा करने के आरोप लगाए गए थे। कार्यकर्ताओं की ओर से उनकी गतिविधियों को लेकर शिकायतें विधायक और प्रदेश भाजपा नेतृत्व तक पहुंचाई गई थीं। शिकायतों में संगठनात्मक बैठकों और कार्यक्रमों के संचालन को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया गया था। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने मामले पर संज्ञान लिया।
शिकायतों के बावजूद गतिविधियां जारी रहने का आरोप
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शिकायतें सामने आने और संगठन स्तर पर ध्यान दिए जाने के बाद भी दुर्गाशंकर मिश्रा की कथित पार्टी विरोधी गतिविधियां जारी रहीं। इससे क्षेत्र में भाजपा के भीतर गुटबाजी और आपसी मतभेद की स्थिति बनने की बात कही गई। कार्यकर्ताओं के बीच भी असंतोष की स्थिति पैदा होने के आरोप लगे। इसके बाद प्रदेश नेतृत्व ने मामले में औपचारिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
20 जुलाई को जारी हुआ था कारण बताओ नोटिस
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंहदेव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दुर्गाशंकर मिश्रा को 20 जुलाई को नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के माध्यम से उनसे पार्टी विरोधी गतिविधियों और संगठनात्मक बैठकों को प्रभावित करने के आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा गया था। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। इसके बाद मिश्रा की ओर से लिखित जवाब भेजा गया, लेकिन भाजपा नेतृत्व उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुआ।

जवाब से संतुष्ट नहीं हुई भाजपा
25 अगस्त को प्रदेश भाजपा महामंत्री नवीन मार्कंडेय की ओर से जारी निष्कासन आदेश में कहा गया कि दुर्गाशंकर मिश्रा लगातार भाजपा कार्यकर्ताओं को परेशान करने के साथ बैठकों और कार्यक्रमों को प्रभावित कर रहे थे। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि इन्हीं गतिविधियों के कारण उन्हें पहले नोटिस जारी किया गया था। उनके द्वारा दिए गए जवाब को पार्टी ने संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर छह वर्ष के निष्कासन की कार्रवाई की गई।
संगठन विरोधी गतिविधियों पर सख्त संदेश
भाजपा के इस फैसले को पार्टी में अनुशासन को लेकर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। निष्कासन के जरिए प्रदेश नेतृत्व ने संकेत दिया है कि संगठन विरोधी गतिविधियों को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व का संदेश है कि पद या राजनीतिक प्रभाव चाहे जितना भी हो, संगठनात्मक अनुशासन का पालन सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए जरूरी है। MCB जिले में इस कार्रवाई के बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी नजर बनी हुई है।
छह साल तक पार्टी से बाहर रहेंगे मिश्रा
निष्कासन आदेश के अनुसार दुर्गाशंकर मिश्रा को भाजपा की सदस्यता से छह वर्षों के लिए बाहर कर दिया गया है। कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। अब आगामी दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस फैसले का भरतपुर-सोनहत क्षेत्र की भाजपा राजनीति और स्थानीय संगठन पर क्या असर पड़ता है। वहीं, पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों और संगठनात्मक अनुशासन से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर भाजपा में आंतरिक अनुशासन को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।
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