Cabinet Controversy CG : छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 11 से 14 मंत्रियों की संख्या बढ़ाने पर आपत्ति जताई है। इससे पहले भी इसी मामले में एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है।

विवाद का कारण , मंत्रियों की संख्या सीमा का उल्लंघन?
कांग्रेस का दावा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या के 15% से अधिक मंत्रियों की नियुक्ति की है, जो संविधान की धारा 164(1A) के विपरीत है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं, ऐसे में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 13 हो सकती है। मगर सरकार ने 14 मंत्रियों का विस्तार किया है, जो कानून के मुताबिक नियम का उल्लंघन है।

वहीं, भाजपा सरकार ने हरियाणा फॉर्मूले का हवाला देते हुए इस विवाद का बचाव किया है। हरियाणा फॉर्मूला एक राजनीतिक और संवैधानिक विवाद का हिस्सा है जिसमें कुछ राज्यों ने मंत्री संख्या की सीमा को लेकर अलग-अलग व्याख्या की है। भाजपा का तर्क है कि छत्तीसगढ़ में विस्तार नियम के दायरे में है, जबकि कांग्रेस इसका विरोध कर रही है।

संवैधानिक प्रावधान — अनुच्छेद 164(1A)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1A) में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि किसी राज्य में मंत्रिमंडल के सदस्यों की संख्या विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या का 15% से अधिक नहीं हो सकती। यह प्रावधान इस बात को सुनिश्चित करता है कि सरकार में मंत्री संख्या नियंत्रित रहे ताकि प्रशासनिक संसाधनों का संतुलित उपयोग हो सके।
छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधायक होने के कारण, गणितीय हिसाब से मंत्रियों की संख्या 13 से ज्यादा नहीं हो सकती। 14वें मंत्री की नियुक्ति इस सीमा के उल्लंघन की बात उठाती है, जिस पर कोर्ट में सुनवाई हो रही है।
याचिका का राजनीतिक और कानूनी महत्व
यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा विवाद पैदा कर चुका है। विपक्षी कांग्रेस ने इसे संवैधानिक नियमों का उल्लंघन बताते हुए सरकार की आलोचना की है। उनका कहना है कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए नियमों को ताक पर रख रही है। वहीं, भाजपा ने इसे राजनीतिक आरोपों से ऊपर रखते हुए कानून और हरियाणा फॉर्मूले का आधार बताते हुए इस विवाद से दूरी बनाए रखी है।
हाईकोर्ट में सुनवाई कब?
मंत्रिमंडल विस्तार के इस मामले पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी। अदालत दोनों पक्षों के तर्कों को सुनकर अंतिम फैसला करेगी कि क्या सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार संवैधानिक नियमों का उल्लंघन करता है या नहीं। इस फैसले का राज्य की राजनीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच जारी विवाद संवैधानिक सीमा और राजनीतिक हितों के टकराव को दर्शाता है। अनुच्छेद 164(1A) के तहत मंत्रियों की संख्या पर कानून साफ है, लेकिन हरियाणा फॉर्मूले के कारण इस मामले में जटिलताएं भी बनी हुई हैं।
हाईकोर्ट का फैसला राज्य में राजनीतिक स्थिरता और प्रशासनिक सुचारूता के लिए महत्वपूर्ण होगा। वहीं जनता इस विवाद को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हल होने की उम्मीद कर रही है।











