सरकार की सख्ती के बाद मेटा ने ऐसा कदम उठाया जिसने सोशल मीडिया यूज़र्स का ध्यान खींच लिया। कंपनी ने लाखों संदिग्ध अकाउंट हटाने के साथ भारत में भी बड़ी कार्रवाई की। आखिर किन अकाउंट्स पर चला एक्शन और इसके पीछे क्या रही असली वजह? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
सरकार की सख्ती के बाद मेटा ने ऐसा कदम उठाया जिसने सोशल मीडिया यूज़र्स का ध्यान खींच लिया। कंपनी ने लाखों संदिग्ध अकाउंट हटाने के साथ भारत में भी बड़ी कार्रवाई की। आखिर किन अकाउंट्स पर चला एक्शन और इसके पीछे क्या रही असली वजह? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Meta India : इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री और विज्ञापनों के प्रसार को लेकर मचे बवाल के बाद सोशल मीडिया दिग्गज मेटा ने केंद्र सरकार के कड़े रुख पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मेटा ने मंगलवार को एक विस्तृत ब्लॉग जारी करते हुए इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि बाल यौन शोषण एक जघन्य और घिनौना अपराध है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह अपने सभी प्लेटफॉर्म्स, विशेषकर इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ऐसी किसी भी सामग्री के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाती है और इसे रोकने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।


मेटा ने उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह निराधार बताया, जिनमें यह आरोप लगाया गया था कि कंपनी जानबूझकर बाल शोषण से संबंधित विज्ञापनों को चुनिंदा और अनुचित रुचि रखने वाले उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाती है। मेटा का कहना है कि यह दावा तकनीकी रूप से गलत और भ्रामक है। कंपनी ने जोर देकर कहा कि उसका विज्ञापन तंत्र और एल्गोरिदम इस प्रकार की सामग्री को बढ़ावा देने के लिए बिल्कुल नहीं बनाए गए हैं। इसके विपरीत, मेटा का दावा है कि वह उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक निगरानी तकनीकों का उपयोग कर ऐसे संदिग्ध अकाउंट्स और कंटेंट को प्लेटफॉर्म से बाहर करने के लिए दिन-रात काम कर रही है।

अपनी जवाबदेही साबित करने के लिए मेटा ने हालिया आंकड़ों का हवाला दिया। कंपनी ने बताया कि उसने हाल ही में ऐसे एआई-आधारित सिस्टम विकसित किए हैं, जो न केवल प्लेटफॉर्म के भीतर बल्कि बाहरी लिंक और अन्य डिजिटल संकेतों के आधार पर बाल यौन शोषण के नेटवर्क की पहचान करने में सक्षम हैं। इन तकनीकों के दम पर मेटा ने पिछले छह महीनों के भीतर ही केवल भारत में 1.60 लाख से अधिक संदिग्ध अकाउंट्स को हटा दिया है। कंपनी के अनुसार, पिछले एक वर्ष में वैश्विक स्तर पर उसने 40 लाख से अधिक ऐसे अकाउंट्स को स्वतः हटाकर अपनी सुरक्षा प्रतिबद्धता को साबित किया है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा को एक औपचारिक नोटिस जारी किया। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के निर्देशों के बाद सरकार ने मेटा को इंस्टाग्राम पर मौजूद ऐसी सभी आपत्तिजनक सामग्री और विज्ञापनों को तत्काल हटाने का आदेश दिया था। मंत्रालय ने कंपनी से सात दिनों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट और स्पष्टीकरण भी मांगा है। यह नोटिस इस बात का संकेत है कि भारत सरकार बच्चों की सुरक्षा और ऑनलाइन सुरक्षा के मामले में किसी भी स्तर पर समझौता करने को तैयार नहीं है।
मेटा ने कहा कि सरकार की ओर से संज्ञान लेने से पहले ही उसके ऑटोमेटेड सिस्टम ने कई संदिग्ध विज्ञापनों और नियमों का उल्लंघन करने वाले अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें बंद कर दिया था। कंपनी ने विश्वास दिलाया है कि वह सरकारी एजेंसियों के साथ पूर्ण सहयोग करने और अपनी निगरानी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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