Chhattisgarh Cold Wave :
Chhattisgarh Cold Wave : छत्तीसगढ़ का उत्तरी हिस्सा इन दिनों भीषण ठंड की चपेट में है। सरगुजा संभाग के बलरामपुर जिले में स्थिति यह है कि घास और पेड़ों पर गिरी ओस की बूंदें जमकर बर्फ की सफेद चादर बनने लगी हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में अंबिकापुर प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान गिरकर 4.6°C रिकॉर्ड किया गया। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस की मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन इसके बाद पारा एक बार फिर गोता लगाएगा, जिससे ठंड का प्रकोप और बढ़ सकता है।
राजधानी रायपुर में भी ठंड के साथ-साथ कोहरे और धुंध का असर देखा जा रहा है। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि सुबह और शाम के समय यात्रा करते समय वाहनों की हेडलाइट और हैज़र्ड लाइट का उपयोग करें और गति धीमी रखें। रायपुर में न्यूनतम तापमान औसतन 12°C के आसपास रहने की संभावना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों के लिए गर्म कपड़ों की पर्याप्त व्यवस्था रखने की हिदायत दी है। पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान की बात करें तो बिलासपुर 26.6°C के साथ सबसे गर्म रहा।
छत्तीसगढ़ में इस हाड़ कंपाने वाली ठंड के पीछे मुख्य कारण ‘पश्चिमी विक्षोभ’ और ‘तेज जेट स्ट्रीम’ का तालमेल है। इसे एक सरल उदाहरण से समझा जा सकता है: मान लीजिए कि उत्तर भारत का हिमालयी क्षेत्र एक खुला हुआ फ्रिज है और जेट स्ट्रीम एक शक्तिशाली पंखा है। यह पंखा फ्रिज की ठंडी हवाओं को तेजी से मध्य भारत और छत्तीसगढ़ की ओर धकेल रहा है। इसी सिनोप्टिक सिस्टम के कारण राज्य के रात के तापमान में भारी गिरावट आई है और सुबह-शाम शीतलहर जैसे हालात बने हुए हैं। उत्तर भारत की बर्फीली हवाओं के निर्बाध प्रवाह ने मैदानी इलाकों को भी ठंडा कर दिया है।
कड़ाके की ठंड का सबसे घातक असर नवजात बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। अकेले रायपुर के अंबेडकर अस्पताल और निजी अस्पतालों में पिछले एक महीने के भीतर हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में बहुत जल्दी ठंडा हो जाता है क्योंकि उनकी मांसपेशियां और वसा परत पूरी तरह विकसित नहीं होतीं। विशेष रूप से सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा अधिक देखा जा रहा है। यदि नवजात का शरीर अचानक ठंडा पड़ जाए, तो यह गंभीर लक्षण है और इसके लिए तुरंत एनआईसीयू (NICU) या एसएनसीयू (SNCU) में उपचार की आवश्यकता होती है।
ठंड के कारण मौसमी बीमारियों ने भी पैर पसार लिए हैं। रायपुर के प्रमुख अस्पतालों में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और सांस लेने में तकलीफ के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। अंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग की ओपीडी में रोजाना 2000 से अधिक मरीज पहुँच रहे हैं, जिनमें से 600 से अधिक मरीज केवल ठंड से संबंधित जटिलताओं के शिकार हैं। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे खुद को हाइड्रेटेड रखें और ठंडी हवाओं के सीधे संपर्क में आने से बचें।
छत्तीसगढ़ में ठंड की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। स्कूलों के समय में बदलाव और रैन बसेरों में अलाव की व्यवस्था की जा रही है। मौसम में होने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह अनिवार्य है कि लोग अपनी और अपने बच्चों की सेहत के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरतें। अगले कुछ दिन छत्तीसगढ़ के लिए मौसम की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं।
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