Chhattisgarh Congress : नई दिल्ली में छात्र आंदोलन और उसके बाद हुए घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के निर्देश पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 23 जुलाई 2026 को राज्य के सभी ब्लॉकों में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला किया है। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा, छात्रों की आवाज उठाने और हालिया घटनाओं के विरोध में किया जा रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस ने जारी किए संगठनात्मक निर्देश
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर सभी जिला, शहर, नगर और ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को प्रदर्शन की तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। संगठन ने स्थानीय इकाइयों से कहा है कि विरोध कार्यक्रम में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही छात्रों, युवाओं, अभिभावकों और आम नागरिकों को भी इस आंदोलन से जोड़ने का आह्वान किया गया है, ताकि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाया जा सके।

दिल्ली की घटना को लेकर कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस का कहना है कि नई दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस सांसदों, वरिष्ठ नेताओं और छात्रों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है। पार्टी का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल खड़े करती है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस अब प्रदेश स्तर पर जनता के बीच जाकर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रही है।
पहली मांग: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस की पहली प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी है। पार्टी का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में सामने आई अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालय की बनती है। कांग्रेस का कहना है कि जवाबदेही तय करने के लिए इस विषय पर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।
दूसरी मांग: संसद में व्यापक चर्चा हो
कांग्रेस ने दूसरी प्रमुख मांग के रूप में संसद में परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर तत्काल चर्चा कराने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि लाखों छात्रों से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर संसद में विस्तृत बहस होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी नीति तैयार की जा सके।
तीसरी मांग: दर्ज मामलों को वापस लेने की अपील
कांग्रेस ने नई दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर तथा कानूनी मामलों को वापस लेने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी है, तो उसके खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई अनुचित रही।
शांतिपूर्ण और अनुशासित आंदोलन पर रहेगा जोर
प्रदेश कांग्रेस ने अपने सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि विरोध प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किए जाएं। संगठन ने यह भी कहा है कि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो और आंदोलन के संदेश को सकारात्मक ढंग से जनता तक पहुंचाया जाए। साथ ही मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से कार्यक्रम की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रदेश की राजनीति पर रहेगी नजर
23 जुलाई को आयोजित होने वाले इस प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन को राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि वह छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी। वहीं अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि इस आंदोलन का राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है तथा सरकार इन आरोपों और मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है।












