CG News : छत्तीसगढ़ में फसल गिरदावरी और धान के वास्तविक रकबे का आकलन करने के लिए शुरू की गई करीब 100 करोड़ रुपये की परियोजना विवादों में घिर गई है। राजस्व विभाग ने लगभग दो साल पहले फसलों के भौतिक सत्यापन के लिए रामटेक सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस को निविदा दी थी। अब आरोप लगाए जा रहे हैं कि कंपनी एक साल भी काम पूरा किए बिना परियोजना छोड़कर चली गई। इसके बाद फसल सर्वे की जिम्मेदारी पटवारियों और सर्वेयरों को सौंपे जाने तथा इस्तेमाल किए जा रहे एप की तकनीकी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
प्ले स्टोर के बजाय निजी लिंक से डाउनलोड कराने का आरोप
फसल सर्वे के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पीबीएफ यानी फिजिकल वेरिफिकेशन एप को लेकर भी विवाद सामने आया है। आरोप है कि पटवारियों और सर्वेयरों को यह एप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने के बजाय निजी लिंक के माध्यम से इंस्टॉल करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। एप डाउनलोड करते समय हार्मफुल सॉफ्टवेयर से संबंधित चेतावनी दिखाई देने की बात भी कही गई है। इससे एप की सुरक्षा और उसकी विश्वसनीयता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, इस चेतावनी के आधार पर ही एप को नुकसान पहुंचाने वाला सॉफ्टवेयर मान लेना उचित नहीं होगा।
सर्वर फेल होने और फोटो अपलोड में परेशानी
मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को एप के संचालन में कई समस्याओं का सामना करना पड़ने की शिकायतें हैं। बताया जा रहा है कि एप का सर्वर बार-बार बाधित होता है, खेतों की तस्वीरें अपलोड नहीं हो पातीं और लोकेशन दर्ज करने में भी परेशानी आती है। इन तकनीकी दिक्कतों के कारण सर्वे कार्य प्रभावित होने और कर्मचारियों का समय बर्बाद होने की बात कही जा रही है। यदि डिजिटल सर्वे के आंकड़े समय पर और सही तरीके से दर्ज नहीं होते हैं, तो फसल के वास्तविक रकबे के आकलन पर भी असर पड़ सकता है।
फसल सर्वे में दर्ज करनी होगी कई अहम जानकारियां
पीबीएफ एप के माध्यम से सर्वेयरों को खेत की चारों दिशाओं के अक्षांश और देशांतर यानी लैटिट्यूड-लॉन्गिट्यूड दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा किसानों से संबंधित जानकारी, धान की किस्म और बीज खरीदने के स्रोत का विवरण भी दर्ज किया जाना है। खरीदे गए बीज के बोरे पर लिखे रेफरेंस नंबर के आधार पर बीज संबंधी जानकारी का सत्यापन करने की व्यवस्था बताई गई है। इन जानकारियों का उद्देश्य फसल सर्वे को अधिक व्यवस्थित बनाना और खेतों में बोई गई फसल का विवरण जुटाना है।
पटवारी संघ ने कंपनी के कामकाज पर उठाए सवाल
राजस्व पटवारी संघ के अध्यक्ष भागवत साहू ने कंपनी के कामकाज और एप की उपलब्धता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कंपनी को राजस्व विभाग के लिए एप तैयार करके उपलब्ध कराना था, लेकिन एप प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने परियोजना अधूरी छोड़ने के आरोपों की जांच कराने की मांग भी उठाई है। पटवारी संघ के मुताबिक, अब वही काम पटवारियों को करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिसे पहले कंपनी के माध्यम से कराया जा रहा था।
राजस्व विभाग ने आरोपों को बताया गलत
वहीं, राजस्व विभाग के संचालक विनीत नंदनवार ने लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पटवारियों को सौंपे गए दायित्वों का पालन करना चाहिए, ताकि राज्य शासन का काम सुचारू रूप से पूरा हो सके। इस मामले में एक ओर एप की तकनीकी समस्याओं और परियोजना की प्रगति पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर विभाग ने कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारी पूरी करने की बात कही है। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान के वास्तविक रकबे के आकलन को देखते हुए एप की समस्याओं, परियोजना की स्थिति और सर्वे आंकड़ों की शुद्धता पर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।
Read More : CG News: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से पहले प्रशासन का एक्शन, 26 क्विंटल धान जब्त