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Padma Awards : छत्तीसगढ़ के गोडबोले दंपती पद्मश्री से सम्मानित, एक लाख मरीजों का किया मुफ्त इलाज

Padma Awards : देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म पुरस्कारों को लेकर नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन से एक बेहद सुखद और गौरवशाली खबर सामने आई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में आयोजित ‘सिविल इन्वेस्टिचर समारोह’ के पहले चरण (फेज 1) में देश की 66 महान हस्तियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया। इस गरिमामयी समारोह में छत्तीसगढ़ के सुदूर, दुर्गम और कभी नक्सल प्रभावित रहे दंतेवाड़ा और अबूझमाड़ जैसे वनांचल क्षेत्रों में दशकों से निस्वार्थ भाव से चिकित्सा सेवा दे रहे डॉक्टर दंपती—डॉ. रामचंद्र त्रयम्बक गोडबोले और उनकी धर्मपत्नी डॉ. सुनीता गोडबोले को ‘पामश्री’ सम्मान से विभूषित किया गया। केंद्र सरकार ने इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में डॉक्टर दंपती के अद्वितीय समर्पण, अटूट सेवा भावना और अद्वितीय मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोच्च सम्मान देते हुए राष्ट्रीय पटल पर पहचान दी है।

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१ लाख से अधिक वनवासियों का किया मुफ्त इलाज, वर्ष 2026 में कुल 131 हस्तियों का चयन

डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले ने बस्तर संभाग के अत्यंत पिछड़े और संवेदनशील इलाकों में रहते हुए अब तक 1 लाख से भी अधिक गरीब और बेसहारा मरीजों का पूरी तरह से नि:शुल्क (फ्री) इलाज कर समाज सेवा की एक अनूठी और बेमिसाल मिसाल कायम की है। इस वर्ष, यानी साल 2026 में केंद्र सरकार द्वारा देशभर की कुल 131 प्रतिष्ठित हस्तियों को पद्म पुरस्कारों के लिए चुना गया है। राष्ट्रपति द्वारा आयोजित इस पहले चरण के भव्य उत्सव में जहाँ 66 महानुभावों को अलंकृत किया जा चुका है, वहीं शेष बचे 65 विजेताओं को अगले यानी दूसरे चरण के समारोह में सम्मानित किया जाएगा, जिसकी आधिकारिक तारीखों का ऐलान होना अभी बाकी है। इसी श्रृंखला में बस्तर संभाग में ही समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली बुधरी ताती को भी आने वाले चरण में पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा।

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महाराष्ट्र छोड़ बस्तर को बनाया अपनी कर्मभूमि, पिछले 35 वर्षों से दे रहे नि:शुल्क सेवाएं

बस्तर के आदिवासियों के बीच आदरपूर्वक ‘डॉक्टर भैया’ और ‘भाभी’ के नाम से मशहूर डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा जिले के रहने वाले हैं। उच्च चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के बाद, शहरी चकाचौंध से दूर इन्होंने वनवासी समाज की सेवा का संकल्प लिया और वर्ष 1990 में दंतेवाड़ा के सुदूर बारसूर इलाके में आकर स्थायी रूप से बस गए। पिछले 35 वर्षों के लंबे अंतराल में इस दंपती ने दक्षिण बस्तर, बीजापुर और सुकमा के घनघोर जंगलों में रहने वाले जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य सुधार में अपना पूरा जीवन पूरी तरह समर्पित कर दिया है।

यह समर्पित दंपती विशेष रूप से ‘MAAS’ योजना के माध्यम से अंचल के मासूम बच्चों को कुपोषण और गंभीर एनीमिया (खून की कमी) जैसी बीमारियों से बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है। इसके साथ ही वे घने जंगलों के अंदरूनी गांवों में मेडिकल कैंप लगाते हैं और मरीजों का लगातार फॉलो-अप भी करते हैं।

“मेरे सामने बैठा हर आदिवासी मेरे लिए साक्षात भगवान है”— भावुक हुए डॉ. रामचंद्र

अपने सेवा सफर के बारे में बात करते हुए भावुक मन से डॉ. रामचंद्र गोडबोले कहते हैं कि, “मेरे चिकित्सा केंद्र में आकर मेरे सामने बैठने वाला हर एक गरीब और लाचार आदिवासी मेरे लिए किसी साक्षात भगवान से कम नहीं है, और उनकी सेवा करना ही मेरी सच्ची पूजा है।” जहाँ डॉक्टर भैया दिन-रात मरीजों की नब्ज टटोलते हैं, वहीं डॉ. सुनीता गोडबोले वनांचल की आदिवासी महिलाओं के स्वयं सहायता संगठनों को मजबूत करने और उनमें सेनेटरी व स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इसके साथ ही यह दंपती स्थानीय स्कूलों के आदिवासी बच्चों को बुनियादी स्वास्थ्य शिक्षा, स्वच्छता के नियम और अच्छे सामाजिक संस्कार देने का अनुकरणीय कार्य भी कर रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई, कहा— गोडबोले दंपती ने छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया

डॉक्टर दंपती को मिले इस सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें पूरे प्रदेश की जनता की ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने अपने बधाई संदेश में कहा कि राष्ट्रपति महोदया द्वारा गोडबोले दंपती को यह सम्मान प्रदान किया जाना जनसेवा, कड़े समर्पण और मानवीय संवेदनशीलता जैसे पवित्र मूल्यों को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च पहचान मिलने का प्रतीक है, जो पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यधिक गर्व और प्रेरणा का विषय है।

उन्होंने आगे कहा कि इस दंपती ने प्रतिष्ठित ‘वनवासी कल्याण आश्रम’ से जुड़कर अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज के उत्थान के लिए होम कर दिया। बस्तर के बारसूर जैसे बेहद दुर्गम इलाकों में रहकर उन्होंने न केवल मुफ्त दवाइयां बांटीं, बल्कि कुपोषण मुक्ति और ग्रामीण-जनजातीय समाज में स्वास्थ्य चेतना बढ़ाने में एक ऐतिहासिक और युगांतकारी भूमिका निभाई है।

कला, विज्ञान और चिकित्सा सहित कुल 3 श्रेणियों में दिए जाते हैं देश के ये सर्वोच्च पद्म पुरस्कार

उल्लेखनीय है कि भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में शुमार किए जाने वाले इन प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों को मुख्य रूप से तीन विशिष्ट श्रेणियों— ‘पद्म श्री’, ‘पद्म भूषण’ और ‘पद्म विभूषण’ में विभाजित कर प्रदान किया जाता है। ये सर्वोच्च सम्मान प्रतिवर्ष देश-विदेश की उन महान विभूतियों को दिए जाते हैं जिन्होंने कला, समाज सेवा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, व्यापार, उद्योग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेलकूद, पत्रकारिता और सिविल सेवा जैसे विविध क्षेत्रों में कोई असाधारण, अद्वितीय और उत्कृष्ट कार्य कर मानवता का कल्याण किया हो।

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