छत्तीसगढ़

Election Commission Action : छत्तीसगढ़ के 9 राजनीतिक दलों का पंजीयन रद्द: निर्वाचन आयोग की सख्ती, 6 साल से निष्क्रिय दलों पर कार्रवाई

Election Commission Action : निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ के 9 राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। यह फैसला उन दलों के खिलाफ लिया गया है जो बीते 6 वर्षों से न तो किसी भी चुनाव में भाग ले रहे थे और न ही कोई राजनीतिक गतिविधि संचालित कर रहे थे। आयोग ने यह कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत की है, जिसका उद्देश्य निष्क्रिय दलों को चुनावी व्यवस्था से बाहर करना और राजनीतिक पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।

क्यों की गई यह कार्रवाई?

निर्वाचन आयोग के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत कोई भी राजनीतिक दल अगर लगातार छह साल तक चुनाव में हिस्सा नहीं लेता और कोई सक्रिय राजनीतिक गतिविधि नहीं करता, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। इस अधिनियम की धारा 29A के तहत पंजीकृत दलों पर यह नियम लागू होता है।

छत्तीसगढ़ में अब कितने दल बचे?

अब तक छत्तीसगढ़ में कुल 55 पंजीकृत राजनीतिक दल थे। आयोग की इस कार्रवाई के बाद यह संख्या घटकर 46 रह गई है। यह कदम राज्य की राजनीति में सक्रियता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किन दलों पर हुई कार्रवाई?

रद्द किए गए दलों में शामिल हैं:

छत्तीसगढ़ एकता पार्टी

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा

छत्तीसगढ़ समाजवादी पार्टी

छत्तीसगढ़ संयुक्त जातीय पार्टी

छत्तीसगढ़ विकास पार्टी

पृथक बस्तर राज्य पार्टी

राष्ट्रीय आदिवासी बहुजन पार्टी

राष्ट्रीय मानव एकता कांग्रेस पार्टी

राष्ट्रीय समाजवाद पार्टी संविधान मोर्चा

इन दलों में से कई ने गठन के समय बड़े सामाजिक और क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने का दावा किया था, लेकिन समय के साथ ये दल पूरी तरह निष्क्रिय हो गए।

आयोग का उद्देश्य

निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह फैसला निष्क्रिय दलों को हटाकर केवल उन राजनीतिक दलों को बनाए रखने का प्रयास है जो वास्तव में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। इससे न केवल चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी बल्कि फर्जी या कागज़ी दलों के माध्यम से धन शोधन जैसी गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी।

यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में निष्क्रिय राजनीतिक दलों पर लगाम लगाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे राजनीतिक दलों को अपनी सक्रियता बनाए रखने का स्पष्ट संदेश गया है, वहीं आम जनता के लिए यह आश्वासन है कि चुनावी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जा रहा है।

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