Kanker Blast
Kanker Blast : नियति की क्रूरता कई बार इंसान की कल्पना से परे होती है। जिस घर में अभी पखवाड़े भर पहले खुशियों की शहनाइयां गूंजने की तैयारी हो रही थी, जहां बेटे की सगाई के लड्डू बांटे गए थे और जहां जनवरी 2027 में होने वाली शादी के लिए कपड़ों से लेकर मेहमानों तक की लिस्ट बन रही थी, वहां आज मातमी सन्नाटा पसरा है। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से आई एक खबर ने न केवल एक परिवार की उम्मीदों को राख कर दिया, बल्कि पूरे प्रदेश की आंखों में आंसू ला दिए हैं। 2 मई 2026 को नक्सलियों द्वारा डंप किए गए खतरनाक विस्फोटक को नष्ट करते समय हुए एक आकस्मिक हादसे में बस्तर फाइटर्स के चार जांबाज जवानों ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। इन शहीदों में संजय कुमार गढ़पाले की कहानी ऐसी है जिसे सुनकर पत्थर दिल भी पिघल जाए।
शहीद जवान संजय कुमार गढ़पाले कांकेर जिले के ग्राम हराडुला के एक साधारण परिवार के चिराग थे। 14 फरवरी 1997 को जन्मे संजय का जीवन संघर्षों और देश सेवा के जुनून से भरा था। उनके पिता गांव में एक छोटी सी साइकिल मरम्मत की दुकान चलाते हैं, लेकिन संजय की आंखों में आसमान छूने के ख्वाब थे। बचपन से ही खाकी या ऑलिव ग्रीन वर्दी पहनने की चाहत रखने वाले संजय ने पहले सेना में भर्ती होने के लिए दिन-रात एक कर दिया था। हालांकि, किस्मत को कुछ और मंजूर था; आर्मी में चयन न होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बस्तर में शांति बहाली के लिए गठित ‘बस्तर फाइटर्स’ में अपनी जगह बनाई। 9 फरवरी 2022 को उनकी नियुक्ति हुई और उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ जंगलों में मोर्चा संभाला।
संजय अपने माता-पिता के बड़े बेटे थे और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। परिवार ने बड़े अरमानों के साथ उनके लिए रिश्ता तय किया था। महज 15 दिन पहले ही संजय अपनी सगाई के लिए 5 दिन की छुट्टी लेकर गांव आए थे। घर में उत्सव का माहौल था, सगाई की रस्में पूरी हुईं और जनवरी 2027 में शादी की तारीख तय कर दी गई। संजय वापस ड्यूटी पर लौटे तो दिल में नई जिंदगी के सुनहरे सपने थे, लेकिन शनिवार को जब पुलिस की गाड़ी उनके घर के सामने रुकी, तो वह खुशियां देने नहीं बल्कि शहादत का पैगाम लेकर आई थी। पिता सुरेश गढ़पाले बदहवास हैं और बार-बार बस यही कह रहे हैं कि बेटा अपनी शादी और परिवार के बेहतर भविष्य के सपने देखता था, पर अब सब कुछ एक झटके में खत्म हो गया।
यह दुखद हादसा कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मार्काबेडा, कोरोसकोडो और आदनार के घने जंगलों में हुआ। सुरक्षा बलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि नक्सलियों ने आने वाले समय में बड़े हमलों को अंजाम देने के लिए भारी मात्रा में विस्फोटक और अन्य सामग्री डंप कर रखी है। इस सूचना पर बस्तर फाइटर्स और पुलिस की एक संयुक्त टीम सर्च ऑपरेशन पर निकली। घने जंगलों की खाक छानते हुए टीम को एक डंप मिला, जहां से कंप्यूटर, मॉनिटर और प्रिंटर जैसी सामग्रियां मिलीं। इसी के पास एक दूसरे ठिकाने की तलाशी लेने पर माओवादियों द्वारा छिपाकर रखी गई 15-15 किलो की 5 बोरियां बरामद हुईं। इनमें लगभग 75 किलो ‘पटाखा पाउडर’ (विस्फोटक सामग्री) भरा हुआ था।
कांकेर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) निखिल राखेचा ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि बरामद बारूद को जंगल के बीचों-बीच सुरक्षित तरीके से नष्ट करना अनिवार्य था, ताकि वह दोबारा नक्सलियों के हाथ न लगे। बम निरोधक दस्ते (BDS) की टीम प्रभारी की देखरेख में प्रोटोकॉल के तहत नष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर की झुलसा देने वाली गर्मी और अत्यधिक तापमान की वजह से विस्फोटक पाउडर में अचानक कोई रासायनिक प्रक्रिया (Chemical Reaction) हुई। इसी दौरान एक भीषण विस्फोट हुआ जिसने आसपास मौजूद जवानों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। धमाका इतना जबरदस्त था कि उसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई।
इस दुर्भाग्यपूर्ण धमाके की चपेट में आने से घटनास्थल पर ही तीन जवानों ने दम तोड़ दिया। शहीदों में आरक्षक संजय गढ़पाले के साथ-साथ निरीक्षक सुखराम वट्टी और आरक्षक कृष्णा कोमरा शामिल थे। चौथे जवान, आरक्षक परमानंद कोर्राम गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सूचना मिलते ही तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया और घायल जवान को हेलीकॉप्टर के जरिए अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने भी अंतिम सांस ली। इस तरह छत्तीसगढ़ पुलिस ने अपने चार बेहतरीन और साहसी कमांडो खो दिए।
बस्तर आईजी सुंदरराज पट्टलिंगम ने इस घटना को विभाग के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने कहा कि निरीक्षक सुखराम वट्टी एक अनुभवी अधिकारी थे और उनके नेतृत्व में इसी टीम ने पहले भी कई बार माओवादियों द्वारा लगाए गए खतरनाक आईईडी और डंप किए गए विस्फोटकों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर हजारों जानें बचाई थीं। आईजी ने कहा, “आज की यह आकस्मिक दुर्घटना हमारे लिए अत्यंत दुखद है। हमने अपने चार बहादुर योद्धाओं को खो दिया है। राष्ट्र की सुरक्षा और बस्तर में शांति के लिए उनके इस सर्वोच्च बलिदान को कभी भुलाया नहीं जाएगा। पूरा पुलिस महकमे उनके परिवारों के साथ खड़ा है।”
शहीद जवानों के पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांवों में पहुंचे, तो वहां का माहौल गमगीन हो गया। संजय कुमार गढ़पाले के गांव हराडुला में हर आंख नम है। जिस घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, वहां अब चिता की आग जलने वाली है। इन जवानों की शहादत हमें याद दिलाती है कि हम अपने घरों में जो चैन की नींद सोते हैं, उसकी कीमत बस्तर के जंगलों में ये जांबाज अपने खून से चुकाते हैं। देश इन वीरों की शहादत को हमेशा सलाम करेगा।
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