Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पांच दिन की कस्टोडियल रिमांड आज खत्म हो रही है। उन्हें आज रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया जाएगा। शराब घोटाला और मनी-लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी बनाए गए चैतन्य से ED ने बीते पांच दिनों में कई नए तथ्यों पर पूछताछ की है।

भिलाई से गिरफ्तारी, 16.70 करोड़ का आरोप
ED ने 18 जुलाई को भिलाई से चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि शराब घोटाले से निकली ब्लैक मनी में से 16.70 करोड़ रुपये चैतन्य तक पहुंचे। इस रकम को कथित तौर पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में इन्वेस्ट कर वाइट करने की कोशिश की गई।

विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट में इन्वेस्टमेंट
ED की जांच में सामने आया कि चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में घोटाले का पैसा लगाया गया। प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट और कंसल्टेंट से पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रोजेक्ट पर वास्तविक खर्च 13–15 करोड़ था, जबकि रिकॉर्ड में सिर्फ 7.14 करोड़ दिखाए गए। जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस में यह भी मिला कि एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ कैश पेमेंट किया गया, लेकिन इसे अकाउंट में दर्ज नहीं किया गया।
फर्जी फ्लैट खरीदी का खुलासा
ED ने बताया कि कारोबारी त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने 19 फ्लैट अपने कर्मचारियों के नाम पर खरीदे, जबकि पेमेंट उन्होंने खुद किया। इस खरीद-फरोख्त का पूरा लेन-देन 19 अक्टूबर 2020 को एक ही दिन हुआ। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह एक पूर्व-योजना के तहत मनी-लॉन्ड्रिंग थी, जिसका मकसद ब्लैक मनी को छिपाकर चैतन्य तक पहुंचाना था।
5 करोड़ कैश को लोन दिखाया
ED के अनुसार, भिलाई के एक ज्वेलर ने चैतन्य की कंपनियों को 5 करोड़ रुपए “लोन” दिए। बाद में उसी ज्वेलर ने बघेल डेवलपर्स से 80 लाख के 6 प्लॉट खरीद लिए। एजेंसी का दावा है कि यह पैसा शराब घोटाले से आया हुआ कैश था, जिसे बैंकिंग चैनल के जरिए “लीगल” दिखाने की कोशिश की गई।
फ्रंट कंपनियों का इस्तेमाल
ED ने कहा कि चैतन्य बघेल ने पैसों को छिपाने के लिए कई कंपनियों और व्यक्तियों को फ्रंट की तरह इस्तेमाल किया। पैसा पहले ढिल्लन सिटी मॉल में आया, फिर ढिल्लन ड्रिंक्स के जरिए कर्मचारियों को ट्रांसफर हुआ और आखिरकार बघेल डेवलपर्स तक पहुंचाया गया।
2000 करोड़ के घोटाले की जांच
छत्तीसगढ़ का यह शराब घोटाला 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बताया जा रहा है। ED ने ACB की FIR के आधार पर जांच शुरू की थी। इस घोटाले में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर सहित कई बड़े नाम शामिल हैं। आरोप है कि यह पूरा सिंडिकेट भूपेश सरकार के कार्यकाल में सक्रिय था और अवैध रूप से शराब बेचकर मोटी रकम इकट्ठी करता था।
आज होगी बड़ी सुनवाई
आज रायपुर कोर्ट में पेशी के दौरान यह तय होगा कि ED चैतन्य बघेल की रिमांड आगे बढ़ाएगी या उन्हें फिर से न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा। मामले पर प्रदेश की राजनीति भी गरमाई हुई है। कांग्रेस इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रही है।










