Manipur Fuel Crisis: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक बार फिर ईंधन संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग-37 (NH-37) पर तेल टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह रुकने के बाद राजधानी इंफाल सहित राज्य के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। हालात ऐसे हैं कि पेट्रोल पंपों के बाहर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। बड़ी संख्या में लोग संभावित कमी की आशंका को देखते हुए पहले से ही अपने वाहनों में ईंधन भरवाने पहुंच रहे हैं। इससे कई पेट्रोल पंपों पर घंटों इंतजार की स्थिति बन गई है और आम लोगों में भविष्य की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

ट्रांसपोर्टर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल बनी वजह
यह स्थिति ऑल मणिपुर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन (AMPPTA) द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल और काम बंद करने के फैसले के बाद उत्पन्न हुई है। एसोसिएशन ने तेल टैंकरों का संचालन रोकने का निर्णय लेते हुए कहा है कि जब तक उनके ड्राइवरों और ऑपरेटरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक वे इंफाल-जिरीबाम मार्ग पर ईंधन की ढुलाई शुरू नहीं करेंगे। इस फैसले का असर पूरे राज्य की ईंधन आपूर्ति पर पड़ना शुरू हो गया है।

सरकार को पहले ही दिया गया था अल्टीमेटम
ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि उसने इस मुद्दे को अचानक नहीं उठाया। संगठन ने 15 जुलाई को ही मणिपुर सरकार को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया था और समाधान के लिए 15 दिनों का समय दिया था। इसके बाद 29 जुलाई को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई, लेकिन बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। यही कारण रहा कि एसोसिएशन ने 31 जुलाई से अनिश्चितकालीन काम बंद करने का फैसला लागू कर दिया।
सुरक्षा और अवैध वसूली बना सबसे बड़ा मुद्दा
एसोसिएशन का आरोप है कि इंफाल-जिरीबाम राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेल टैंकरों का संचालन लगातार असुरक्षित होता जा रहा है। संगठन के अनुसार, विभिन्न उग्रवादी समूहों की ओर से ट्रांसपोर्टरों को लगातार धमकियां दी जाती हैं और उनसे जबरन अवैध वसूली की जाती है। ड्राइवरों और ऑपरेटरों को अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा महसूस हो रहा है। यही वजह है कि संगठन ने सरकार से प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की मांग करते हुए परिवहन सेवाएं रोक दी हैं।
225 किलोमीटर के मार्ग पर कई स्थानों पर वसूली का आरोप
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का दावा है कि लगभग 225 किलोमीटर लंबे जिरीबाम-इंफाल मार्ग पर ट्रांसपोर्टरों को कम से कम छह अलग-अलग स्थानों पर कथित रूप से अवैध ‘टैक्स’ देने के लिए मजबूर किया जाता है। संगठन ने जिन प्रमुख स्थानों का उल्लेख किया है, उनमें अवांगखुल, कंबिरोन, नुंगबा, जिरीबाम पार्किंग, नोनी और ओइनमलोंग शामिल हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इस तरह की अवैध वसूली से न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि ड्राइवरों की सुरक्षा भी लगातार खतरे में बनी रहती है।
राजमार्ग पर सुरक्षा की मांग हुई तेज
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिक मांग केवल सुरक्षित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि यदि राज्य सरकार राजमार्ग पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करे और अवैध वसूली पर प्रभावी कार्रवाई करे, तो तेल टैंकरों का संचालन दोबारा शुरू किया जा सकता है। फिलहाल संगठन अपने निर्णय पर कायम है और सरकार की ओर से ठोस सुरक्षा आश्वासन मिलने का इंतजार कर रहा है।
पेट्रोल पंपों पर बढ़ी भीड़, जनता में चिंता
तेल टैंकरों की आवाजाही बंद होने का असर अब आम लोगों पर भी दिखाई देने लगा है। इंफाल और अन्य जिलों के कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। लोग आशंका जता रहे हैं कि यदि आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता और प्रभावित हो सकती है। इसी डर के कारण बड़ी संख्या में लोग अतिरिक्त ईंधन भरवाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे पंपों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
समाधान नहीं निकला तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के बीच जल्द सहमति नहीं बनती, तो इसका असर केवल ईंधन आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई और अन्य सार्वजनिक सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। फिलहाल सभी की नजर राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि सुरक्षा संबंधी मांगों का शीघ्र समाधान निकाल लिया जाता है, तो ईंधन आपूर्ति सामान्य हो सकती है। अन्यथा मणिपुर में ईंधन संकट और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।











