Chhattisgarh liquor scam: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद चैतन्य बघेल की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका में उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई गिरफ्तारी को चुनौती दी है। इस याचिका पर जस्टिस अरविंद वर्मा की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए अगली तारीख 23 सितंबर 2025 तय की है। ईडी की ओर से लिखित जवाब दाखिल किया जा चुका है, अब अगली सुनवाई में दोनों पक्षों को अपने तर्क प्रस्तुत करने होंगे।

क्या है मामला?
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, शराब घोटाले से प्राप्त अवैध धन को चैतन्य बघेल तक पहुंचाया गया और उन्होंने उस पैसे का इस्तेमाल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में किया। ईडी का दावा है कि बघेल को 16.70 करोड़ रुपये की अवैध रकम प्राप्त हुई, जिसे “विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट” (बघेल डेवलपर्स) में इन्वेस्ट किया गया।

ईडी के मुताबिक, सिर्फ 26 बोगस फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई। रिकॉर्ड में 7.14 करोड़ दिखाए गए जबकि वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ के बीच था। ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपये कैश में भुगतान किया गया, जिसका कोई दस्तावेज़ी सबूत नहीं है।
ईडी का आरोप: 1000 करोड़ की ‘लेयरिंग’ और राजनीतिक कनेक्शन
ईडी के वकील सौरभ पांडे ने बताया कि शराब घोटाले में कई नामजद आरोपी हैं जिनके आपस में मजबूत कनेक्शन हैं। अनवर ढेबर, दीपेंद्र चावड़ा, केके श्रीवास्तव और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के ज़रिए पैसे की चेन चैतन्य बघेल तक पहुंचती थी।
ईडी को मोबाइल चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल डिवाइसेस से मिले साक्ष्यों में भी बघेल की भूमिका सामने आई है।
बचाव पक्ष का पक्ष: ‘पूर्व मुख्यमंत्री का दामाद होने की सजा मिल रही है’
चैतन्य बघेल की ओर से पेश वकील फैजल रिजवी ने कहा कि ईडी ने सिर्फ एक पक्षीय बयान के आधार पर गिरफ्तारी की है। उन्होंने कहा, “पप्पू बंसल के बयान को बिना जांच के स्वीकार कर लिया गया जबकि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लंबित है और वे खुलेआम घूम रहे हैं।”
रिजवी ने यह भी तर्क दिया कि चैतन्य बघेल को एक भी समन नहीं भेजा गया, न ही जांच के दौरान कोई बयान दर्ज किया गया। इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार किया गया, जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।
शराब घोटाला: क्या है पूरा घोटाला?
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच में सामने आया है कि पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में एक संगठित सिंडिकेट द्वारा लगभग 3200 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया। इस सिंडिकेट में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी, और कारोबारी अनवर ढेबर का नाम सामने आया है।
इस घोटाले में शराब बिक्री और डिस्ट्रीब्यूशन से अवैध तरीके से ब्लैक मनी पैदा की गई और उसे विभिन्न चैनलों से सफेद धन में बदला गया, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग के रूप में देखा जा रहा है।
चैतन्य बघेल की याचिका पर हुई सुनवाई में जहां ईडी ने मजबूत साक्ष्य का हवाला दिया, वहीं बचाव पक्ष ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताया। अब 23 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में फैसला होगा कि क्या गिरफ्तारी कानूनसम्मत थी या इसे चुनौती दी जा सकती है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक की परतें खोल रहा है, जिसमें राजनीति, प्रशासन और व्यापार का गठजोड़ सामने आ रहा है।
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