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Chhattisgarh Liquor Scam: ईडी ने पूर्व सीएम की करीबी IAS अधिकारी सौम्या चौरसिया को किया गिरफ्तार

Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाले (Liquor Scam) को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने राज्य प्रशासनिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी रहीं सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। सौम्या चौरसिया को ईडी ने घोटाले से संबंधित पूछताछ के लिए समन जारी किया था। कई घंटों की लंबी पूछताछ के बाद, मंगलवार शाम को उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद, सौम्या चौरसिया को बुधवार सुबह 11 बजे रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहां ईडी उनकी रिमांड की मांग करेगी ताकि घोटाले की आगे की कड़ियों को जोड़ा जा सके। गिरफ्तारी के समय सौम्या चौरसिया ने मीडिया या अधिकारियों के सामने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सौम्या चौरसिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में एक महत्वपूर्ण पद पर पदस्थ थीं और उन्हें पूर्व सीएम का करीबी माना जाता था।

Chhattisgarh Liquor Scam: पूछताछ के लिए कार्यालय पहुंची सौम्या चौरसिया: सामने आया वीडियो

सौम्या चौरसिया मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित ईडी के कार्यालय पहुंची थीं। ईडी कार्यालय पहुंचने पर उन्होंने मीडियाकर्मियों से कोई चर्चा नहीं की। सामने आए वीडियो फुटेज में देखा गया कि वह अपनी गाड़ी से उतरने के तुरंत बाद तेज रफ्तार से ईडी ऑफिस की ओर बढ़ीं।इस दौरान उनकी नजरें झुकी हुई थीं और उनका हाथ स्वेटर की जेब में था, जो एक तनावपूर्ण स्थिति को दर्शाता है। अधिकारी की यह शीघ्र गिरफ्तारी दर्शाती है कि ईडी के पास उनसे पूछताछ के बाद कुछ ठोस सबूत या जानकारियां सामने आई हैं, जिसके आधार पर आगे की जांच के लिए उन्हें हिरासत में लेना जरूरी हो गया। यह गिरफ्तारी राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा करने वाली है।

Chhattisgarh Liquor Scam: करीब 3200 करोड़ का है घोटाला: नियमों से छेड़छाड़ का आरोप

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल के दौरान सामने आया था और यह राज्य में हुए सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक है। ईडी का दावा है कि कांग्रेस सरकार में, कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों ने मिलकर शराब बिक्री के नियमों से छेड़छाड़ की। इसमें नकली होलोग्राम का उपयोग, लाइसेंस शुल्क में हेराफेरी और अवैध शराब की बिक्री जैसे कार्य शामिल हैं।

ईडी का दावा है कि इस संगठित आपराधिक षड्यंत्र के माध्यम से करीब 3200 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था। इस मामले में ईडी पहले भी कई बड़े अधिकारियों और नेताओं को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे भी शामिल हैं, जो इस समय जेल में हैं। इस घोटाले की जांच छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक प्रमुख मुद्दा बनी रही है।

सौम्या चौरसिया की राजनीतिक निकटता और प्रशासनिक करियर

सौम्या चौरसिया वर्ष 2008 बैच की पीसीएस (प्रांतीय सिविल सेवा) अधिकारी हैं। उनका जन्म दुर्ग जिले के भिलाई में हुआ था। प्रशासनिक अधिकारी के रूप में, उन्होंने पेंड्रा, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई और पाटन जैसे कई महत्वपूर्ण स्थानों पर एसडीएम (Sub-Divisional Magistrate) के पद पर कार्य किया।

सौम्या चौरसिया की राजनीतिक निकटता इसलिए चर्चा में रही क्योंकि उन्होंने भूपेश बघेल के विधानसभा क्षेत्र पाटन में एसडीएम के रूप में भी काम किया था। ऐसा कहा जाता है कि जब सौम्या चौरसिया पाटन की एसडीएम थीं, तब उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक दक्षता की काफी चर्चा होती थी, जिससे तत्कालीन विधायक भूपेश बघेल भी प्रभावित हुए थे। यह निकटता बाद में उनके सीएमओ में पदस्थापन का आधार बनी।

सीएमओ में बड़ी जिम्मेदारी और पूर्व में कोल लेवी घोटाले में गिरफ्तारी

छत्तीसगढ़ में 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने और भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद सौम्या चौरसिया को राज्य की प्रशासनिक मशीनरी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पद दिया गया। उन्हें तत्काल प्रभाव से मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में पदस्थ किया गया और उपसचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। सीएमओ में उनकी यह पदस्थापना उनके प्रभाव और सत्ता के शीर्ष तक पहुँच को दर्शाती है।

हालांकि, सौम्या चौरसिया का नाम पहली बार किसी बड़े घोटाले में नहीं आया है। इससे पहले, वह कोयला लेवी घोटाले (Coal Levy Scam) में भी आरोपी रही हैं और उस मामले में भी उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। कोयला और अब शराब घोटाले में उनकी लगातार संलिप्तता यह बताती है कि वह पूर्ववर्ती सरकार के दौरान कई महत्वपूर्ण और विवादास्पद फैसलों में शामिल रही हैं, जिनकी अब केंद्रीय एजेंसियां जांच कर रही हैं। ईडी की यह नवीनतम गिरफ्तारी राज्य के उच्च प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में जांच का दायरा और बढ़ा सकती है।

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