Laxmi Rajwade
Laxmi Rajwade : छत्तीसगढ़ सरकार की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने गुरुवार को उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दूरस्थ अंचलों का दौरा किया। विकास कार्यों और विभागीय योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के उद्देश्य से मंत्री ने दुर्गूकोंदल विकासखंड के ग्राम डांगरा में एक अनूठी पहल की। उन्होंने किसी भव्य मंच के बजाय हाई स्कूल परिसर में एक पुराने कुसुम पेड़ के नीचे ‘बाल चौपाल’ लगाई। इस दौरान मंत्री ने प्रोटोकॉल किनारे कर ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर सीधा और आत्मीय संवाद किया, जिससे सरकार और जनता के बीच की दूरी कम होती नजर आई।
बाल चौपाल को संबोधित करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ के फायदों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। अब ग्रामीण महिलाएं छोटी-मोटी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ा है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि विकास की धारा बस्तर के अंतिम छोर तक पहुंच सके।
कार्यक्रम में मंत्री ने गर्भवती और शिशुवती माताओं के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी कि वे अपने दैनिक आहार में प्रोटीन, विटामिन और अतिरिक्त पोषण युक्त भोजन शामिल करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वस्थ मां का होना अनिवार्य है। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना का लाभ उठाने की अपील की। कार्यक्रम में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ जैसे संवेदनशील विषयों की जानकारी दी और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनका कौशल विकास किया।
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया जब मंत्री ने स्वयं अपने हाथों से तीन नन्हे बच्चों का अन्नप्राशन कराया। उन्होंने ग्राम डांगरा की सुकारो बाई की 5 माह की पुत्री रूही नरेटी सहित दो अन्य बच्चों को गोद में लेकर ‘रेडी टू ईट’ से बनी खीर खिलाई। इसके साथ ही, कुपोषण के खिलाफ जंग का संदेश देते हुए पांच माताओं को ‘सुपोषण टोकरी’ भेंट की गई। बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए पांच विद्यार्थियों को ‘विद्यारंभ संस्कार प्रमाण पत्र’ भी प्रदान किए गए। मौके पर ही महतारी वंदन योजना की 68 महिलाओं का ई-केवायसी अपडेट किया गया ताकि उनकी राशि निर्बाध रूप से आती रहे।
औपचारिक कार्यक्रमों के बाद मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए सभी के साथ सामूहिक भोज किया। कुसुम पेड़ की छांव में उन्होंने जमीन पर बैठकर दोना-पत्तल में परोसे गए स्थानीय व्यंजनों जैसे कुल्थी की सब्जी, मड़िया पेज, दाल और चावल का लुत्फ उठाया। यह दृश्य स्थानीय ग्रामीणों के लिए कौतूहल और खुशी का विषय रहा। इसके उपरांत, मंत्री ने भानुप्रतापपुर के चौगेल स्थित पुनर्वास केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण किया, जहां उन्होंने वहां रह रही महिलाओं की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को केंद्र में सुविधाएं बेहतर करने के सख्त निर्देश दिए।इस आयोजन ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ सरकार केवल महलों से नहीं, बल्कि पेड़ों के नीचे और जमीन पर बैठकर जनता की समस्याओं का समाधान करने में विश्वास रखती है।
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