Chhattisgarh Naxal News : नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास की दिशा में गरियाबंद पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। डीजीएन डिवीजन में सक्रिय तीन कुख्यात नक्सलियों – नागेश उर्फ रामा कवासी, जैनी उर्फ देवे मडकम, और मनीला उर्फ सुंदरी कवासी – ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इन तीनों पर शासन द्वारा एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस के अनुसार, तीनों नक्सली ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा के जंगलों में लंबे समय से सक्रिय थे और कई गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं।इनमें शामिल हैं:धमतरी जिले के एकावरी गांव की मुठभेड़,मई 2025 की मोतीपानी मुठभेड़,11 सितंबर 2025 की मेटाल एनकाउंटर,नागेश डीवीसी डमरू का गार्ड था, जैनी ओडिशा स्टेट कमेटी सदस्य प्रमोद उर्फ पांडु की पर्सनल गार्ड रही, जबकि मनीला सीनापाली एरिया कमेटी में पार्टी सदस्य थी।
तीनों नक्सलियों ने आत्मसमर्पण के दौरान बताया कि माओवादी संगठन अपनी मूल विचारधारा से भटक चुका है। अब संगठन के भीतर:
निर्दोष ग्रामीणों की हत्याएं हो रही हैं
कैडरों का शोषण हो रहा है
विकास कार्यों में बाधा, जबरन वसूली और मानसिक उत्पीड़न आम हो गया है
नक्सलियों ने कहा, “हमने देखा कि कई साथी आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में आकर खुशहाल जीवन जी रहे हैं। हम भी अब हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति से जीना चाहते हैं।”
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने राज्य सरकार की पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति की सराहना की। इस नीति के तहत नक्सलियों को मिलती हैं: आर्थिक सहायता, निःशुल्क आवास और स्वास्थ्य सेवाएं,रोजगार और शिक्षा के अवसर,यह समर्पण गरियाबंद पुलिस की E-30 टीम, STF, कोबरा-207 और CRPF के संयुक्त प्रयास से संभव हो सका।
गरियाबंद रेंज पुलिस और आईजी अमरेश मिश्रा ने जिले में सक्रिय अन्य नक्सलियों से भी हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने की अपील की है। उन्होंने कहा:“नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार प्रचारित की जा रही समर्पण नीति से संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा है। यह संकेत है कि नक्सलवाद की कमर टूट रही है।”
जो भी नक्सली आत्मसमर्पण करना चाहता है, वह निकटतम थाना, पुलिस चौकी, कैंप या गरियाबंद नक्सल सेल के नंबर 94792-27805 पर संपर्क कर सकता है।यह आत्मसमर्पण न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस की सक्रिय रणनीति और प्रभावी कार्रवाई का परिणाम है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अब नक्सल प्रभावित क्षेत्र शांति और विकास की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मुख्यधारा में लौट रहे युवाओं की यह पहल आने वाले समय में राज्य को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाएगी।
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