Chirmiri Opencast Accident : दक्षिण पूर्व कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के चिरमिरी ओपनकास्ट खदान में सोमवार सुबह प्रथम पाली के दौरान बड़ा हादसा हो गया। खदान क्षेत्र में कोयला उत्खनन के लिए की जा रही ब्लास्टिंग की तैयारी के दौरान अचानक हुए जोरदार विस्फोट से अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि ड्रिलिंग के बाद बारूद डाला गया था, विस्फोट होने से पहले डेटोनेटर लगाते समय ही ब्लाट हो गया था।




इस विस्फोट में एसईसीएल प्रबंधन से जुड़ी दो महिला और एक पुरुष कर्मचारी समेत करीब आठ मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल रीजनल हॉस्पिटल गोदरीपारा, चिरमिरी में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। घायलों में मैनेजर रविशंकर सहित कृष्ण हाईटेक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तीन श्रमिक भी शामिल हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जिस जगह ब्लास्टिंग की तैयारी की जा रही थी वहां पहले से ही नीचे आग लगी हुई थी, लेकिन आग को सही तरीके से बुझाने के बजाय केवल ऊपर से पानी डालने का काम किया गया। मजदूरों ने आरोप लगाया कि इस तरह की घोर लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास खड़ी कई जेसीबी, ट्रक, पोकलेन मशीनें, बोलेरो और बारूद गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं। घटनास्थल पर दूर-दूर तक पत्थर और मलबा बिखर गया, जिससे खदान का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो गया।

घटना के बाद से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। घायल मजदूरों के परिजन और साथी अस्पताल में नाराजगी जता रहे हैं। उनका आरोप है कि प्रबंधन सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहा है और मजदूरों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मौके पर पहुंचे एसईसीएल अधिकारी और पुलिसकर्मी हालात संभालने की कोशिश में जुटे हैं, लेकिन मजदूर प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग पर अड़े हुए हैं।

पांच लोगों को साधारण चोट के कारण हॉस्पिटल से इलाज करा के छुट्टी दे दी गई। वहीं तीन मजदूर अभी रीजनल हॉस्पिटल में भर्ती हैं। खबर पाकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और महापौर रामनरेश राय घायल लोगों को देखने तुरंत रीजनल हॉस्पिटल गोदरीपारा पहुंचे। मंत्री जायसवाल ने घायलों से हालचाल पूछा और चिकित्सकों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने घटना के बारे में पूरी जानकारी ली और हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया।
स्थानीय यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस हादसे ने एक बार फिर खदान क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रबंधन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।











