Chhattisgarh NEET UG 2026 : प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बड़ी खबर है। इस सत्र में एमबीबीएस की 100 नई सीटें बढ़ाई गई हैं। दो निजी मेडिकल कॉलेजों में 50-50 सीटों का इजाफा होने के बाद राज्य में एमबीबीएस की कुल क्षमता 2925 से बढ़कर 3025 सीट हो गई है। इन सीटों पर प्रवेश के लिए छह हजार से अधिक नीट क्वालिफाइड अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है।
19 अगस्त को जारी हो सकती है मेरिट सूची
प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस प्रवेश के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब उम्मीदवारों को मेरिट सूची और सीट आवंटन का इंतजार है। जानकारी के अनुसार, मेरिट सूची 19 अगस्त को जारी होने की संभावना है, जबकि 20 अगस्त को प्रवेश की पहली आवंटन सूची सामने आ सकती है। इसके बाद पात्र छात्रों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत कॉलेज आवंटित किए जाएंगे।
नए और निजी कॉलेजों में बढ़ी सीटें
राजधानी रायपुर स्थित पद्मावती निजी मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू हो रहा है। शुरुआत में यहां 100 एमबीबीएस सीटों को मंजूरी मिली थी, लेकिन अपील के बाद सीटों की संख्या बढ़ाकर 150 कर दी गई है। वहीं भिलाई के अभिषेक मिश्रा मेडिकल कॉलेज में भी 150 से सीटें बढ़ाकर 250 कर दी गई हैं। रावतपुरा मेडिकल कॉलेज में 50 और रिम्स में 100 सीटों का इजाफा हुआ है।
पांच सरकारी कॉलेजों में भी एमबीबीएस की पढ़ाई
इस सत्र से प्रदेश के कई नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू होने जा रही है। कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, कुनकुरी और दंतेवाड़ा यानी गीदम में 50-50 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। इस तरह इन पांच सरकारी संस्थानों में कुल 250 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही पद्मावती रायपुर में 150 सीटें मिलने से नए कॉलेजों के जरिए कुल 400 सीटों का विस्तार हुआ है।
एक साल में 695 एमबीबीएस सीटों का विस्तार
प्रदेश में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में पिछले एक साल के दौरान एमबीबीएस सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुल 695 नई सीटें जुड़ने से मेडिकल शिक्षा का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ा है। इसके अलावा पांच सरकारी और एक निजी मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिली है, जिनमें कुल 400 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं। इससे नीट क्वालिफाइड छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के अवसर बढ़े हैं।
सीटें बढ़ीं तो क्वालिटी एजुकेशन की चुनौती भी
मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी के साथ अब सबसे बड़ी चुनौती शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने की है। विशेषज्ञों का कहना है कि नए कॉलेजों को मान्यता मिलना सकारात्मक कदम है, लेकिन पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और अनुभवी फैकल्टी की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। सरकारी और निजी संस्थानों में शिक्षकों की कमी रही तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और मेडिकल प्रशिक्षण की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
अलग-अलग कोटे में 3025 सीटों का बंटवारा
प्रदेश में एमबीबीएस की कुल 3025 सीटें अलग-अलग कोटे के तहत निर्धारित की गई हैं। इनमें स्टेट कोटे में 1984 सीटें, मैनेजमेंट कोटे में 553 सीटें, ऑल इंडिया कोटे में 252 सीटें, एनआरआई कोटे में 192 सीटें और सेंट्रल पूल में 44 सीटें शामिल हैं। छात्रों को प्रवेश के दौरान अपने पात्रता और संबंधित कोटे के नियमों का ध्यान रखना होगा।
छात्रों और अभिभावकों को दलालों से सावधान रहने की सलाह
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने छात्रों और अभिभावकों को किसी भी बिचौलिए या दलाल के झांसे में नहीं आने की सलाह दी है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एमबीबीएस प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित की जा रही है। किसी व्यक्ति द्वारा पैसे लेकर सीट दिलाने या सीधे प्रवेश का दावा किया जाता है तो उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
NEET क्वालिफाई और मेरिट में होना जरूरी
मेडिकल कॉलेजों में सीधे जाकर सीट हासिल करने की कोशिश कर रहे छात्रों और अभिभावकों को स्पष्ट किया गया है कि एमबीबीएस में प्रवेश के लिए नीट परीक्षा में क्वालिफाई होना और निर्धारित मेरिट सूची में स्थान पाना अनिवार्य है। प्रवेश प्रक्रिया चिकित्सा शिक्षा संचालनालय की निगरानी में पूरी की जाती है। इसलिए छात्रों को आधिकारिक सूचना और आवंटन सूची के आधार पर ही आगे की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
Read More : Ambikapur : IPS राहुल बंसल केस में शिकायतकर्ता पक्ष पर ₹10 हजार जुर्माना, CBI कोर्ट नाराज