Ambikapur : अंबिकापुर से जुड़े कथित ₹1 करोड़ के लेनदेन मामले में मंगलवार को CBI कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष के लगातार दूसरी बार अनुपस्थित रहने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया और ₹10,000 का जुर्माना लगाने की कार्रवाई की। वहीं, IPS अधिकारी राहुल बंसल की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत के सामने कथित मीडिया ट्रायल का मुद्दा भी उठाया।
दूसरी बार गैरहाजिर रहा शिकायतकर्ता पक्ष
CBI कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने यह माना कि लगातार दो सुनवाई में अनुपस्थिति न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है। जानकारी के अनुसार, पिछली तारीख पर भी शिकायतकर्ता पक्ष ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अगली तारीख देने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार किया था।
मंगलवार को भी पक्षकार की गैरमौजूदगी के बाद न्यायालय ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए ₹10,000 का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पिछली सुनवाई का भी हुआ उल्लेख
अदालत में यह तथ्य भी सामने आया कि पूर्व सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का विकल्प चुना था। उस समय अगली सुनवाई के लिए समय दिया गया था ताकि सभी पक्ष अपनी दलीलें उचित तरीके से रख सकें।
लेकिन निर्धारित तारीख पर फिर से अनुपस्थिति दर्ज होने के कारण न्यायालय ने इसे गंभीरता से लिया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आपराधिक या जांच से जुड़े मामले में लगातार गैरहाजिरी अदालत के समक्ष पक्ष की स्थिति को कमजोर कर सकती है।
राहुल बंसल की ओर से मीडिया ट्रायल पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान IPS अधिकारी राहुल बंसल की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने अदालत के सामने एक महत्वपूर्ण मुद्दा रखा। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्देशों के बावजूद दूसरे पक्ष की ओर से ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य माध्यमों से मामले को सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
वकील ने तर्क दिया कि किसी विचाराधीन मामले को सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करना निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत के विपरीत है। उन्होंने अदालत से इस पहलू पर भी ध्यान देने का आग्रह किया।
वकील बोले— छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश
राहुल बंसल के अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां केवल कानूनी बहस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका उद्देश्य उनके मुवक्किल की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाना भी प्रतीत होता है।
उन्होंने दलील दी कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब किसी भी पक्ष को मीडिया के माध्यम से अपनी बात इस तरह प्रचारित नहीं करनी चाहिए जिससे जनमत प्रभावित हो। वकील ने इसे गंभीर विषय बताते हुए न्यायालय के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई।
अदालत की निगरानी में आगे बढ़ेगी न्यायिक प्रक्रिया
फिलहाल मामले में शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप और राहुल बंसल की ओर से प्रस्तुत दलीलें न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। अदालत ने किसी भी पक्ष के आरोपों पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है और सुनवाई नियमानुसार जारी रहेगी। अब इस बहुचर्चित मामले में अंतिम निष्कर्ष अदालत के विस्तृत निर्णय के बाद ही सामने आएगा। तब तक दोनों पक्षों की दलीलों, साक्ष्यों और न्यायालय की प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।