Education Reform CG : छत्तीसगढ़ में आगामी 16 जून 2026 से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है। इस बार राज्य का स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों की पढ़ाई को और अधिक व्यावहारिक, आकर्षक और मनोरंजक बनाने के लिए एक नया और अनूठा प्रयोग करने जा रहा है। विभाग द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब प्रदेश के सभी प्री-प्राइमरी, प्राइमरी (प्राथमिक) और मिडिल (माध्यमिक) स्तर के स्कूलों में प्रत्येक शनिवार को अनिवार्य रूप से ‘गतिविधि दिवस’ (Activity Day) के रूप में मनाया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक किताबी ज्ञान से इतर बच्चों को एक ऐसा माहौल देना है जहां वे खेल-खेल में नई चीजें सीख सकें।

हर शनिवार आयोजित होंगी विविध गतिविधियां
स्कूल शिक्षा विभाग के आधिकारिक निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक शनिवार को होने वाले गतिविधि दिवस का खाका बेहद रचनात्मक ढंग से तैयार किया गया है। इस विशेष दिन के दौरान स्कूली बच्चों को देश के महान महापुरुषों की जीवनी और उनकी जयंती, राष्ट्रीय व क्षेत्रीय त्योहारों, स्थानीय मेलों, छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और यहां की गौरवशाली परंपराओं के बारे में विस्तार से जागरूक किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए कला, विभिन्न खेलकूद, योग, प्राणायाम और अन्य रचनात्मक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। इन सबका मूल उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है।

स्थानीय हुनरमंदों और विशेषज्ञों के अनुभवों से सीधे सीख सकेंगे स्कूली छात्र
इस नई नीति की एक और बड़ी विशेषता यह है कि अब स्कूली बच्चों को केवल शिक्षकों के भरोसे नहीं रहना होगा, बल्कि वे समाज के अन्य अनुभवी लोगों से भी सीधे संवाद कर सकेंगे। इसके तहत स्कूलों में स्थानीय लोक कलाकारों, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और अलग-अलग क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञों को समय-समय पर आमंत्रित किया जाएगा। ये गणमान्य व्यक्ति बच्चों के बीच आकर अपने जीवन के व्यावहारिक अनुभव साझा करेंगे। इसके साथ ही, कक्षा 6वीं से लेकर 8वीं तक के उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) और भविष्य के रोजगार से जुड़े जरूरी कौशलों की बुनियादी जानकारी भी दी जाएगी।
16 जून से खुलेंगे सरकारी और निजी स्कूल
प्रदेश के सभी शासकीय और निजी विद्यालयों के कपाट 16 जून से नियमित पढ़ाई के लिए पूरी तरह खुल जाएंगे। हालांकि, शैक्षणिक सत्र के औपचारिक स्वागत के लिए आगामी 30 जून को पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर ‘शाला प्रवेश उत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष उत्सव के दौरान नव-प्रवेशी और अन्य बच्चों को शासन की ओर से मुफ्त यूनिफॉर्म, नई पाठ्यपुस्तकें और साइकिलें वितरित की जाएंगी। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला
सत्र की शुरुआत के साथ ही शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर भी एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। राज्य के सभी स्कूलों में पहले से संचालित शाला विकास समितियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। इनके स्थान पर अब एक नई और अधिक पारदर्शी ‘स्कूल मैनेजमेंट कमेटी’ (SMC) का गठन करने का निर्णय लिया गया है। इस नई समिति की सबसे खास बात यह होगी कि इसमें कुल सदस्यों में से 75 प्रतिशत सदस्य अनिवार्य रूप से स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के माता-पिता या अभिभावक होंगे। इतना ही नहीं, समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों का चयन भी इन्हीं अभिभावकों के बीच से लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा।
नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को मिले व्यापक अधिकार
गठित होने वाली नई स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) को पहले की तुलना में कहीं अधिक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सौंपे गए हैं। अब इस समिति के पास स्कूल परिसर के भीतर ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) तक के छोटे-मोटे निर्माण, जीर्णोद्धार और आवश्यक मरम्मत कार्यों को सीधे स्वीकृति देने की वित्तीय शक्ति होगी। इसके अलावा, जिन बच्चों ने किन्हीं कारणों से स्कूल छोड़ दिया है (ड्रॉपआउट बच्चे), उन्हें दोबारा मुख्यधारा की पढ़ाई से जोड़ने, नए बच्चों का नामांकन बढ़ाने, मध्यान्ह भोजन (Mid-Day Meal) की गुणवत्ता की कड़ी निगरानी रखने और विद्यालय की समग्र व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त बनाने की अहम जिम्मेदारी भी इसी समिति के कंधों पर होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को आवश्यक दिशा-निर्देश और आदेश जारी कर दिए हैं।
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