Principal Arrested: छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले से शिक्षा जगत को शर्मसार करने वाली एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। सिमगा थाना क्षेत्र स्थित पूर्व माध्यमिक शाला, कामता में स्कूल के प्राचार्य द्वारा नाबालिग छात्राओं के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपों की पुष्टि के बाद आरोपी प्राचार्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, छात्राओं की शिकायत को दबाने वाली महिला सहायक शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है।

जाति प्रमाण पत्र के बहाने की छेड़छाड़
स्कूल की छात्राओं ने आरोप लगाया है कि प्राचार्य देवलाल साहू (52), निवासी बनसांकरा, ने जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर उनके साथ अनुचित व्यवहार किया और छेड़छाड़ की। यह मामला तब सामने आया जब छात्राओं ने साहस दिखाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सिमगा थाने में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं और आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

महिला सहायक शिक्षक ने दबाया मामला
घटना की जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि पीड़ित छात्राओं ने पहले महिला सहायक शिक्षक हेमा देवांगन (एलबी) से शिकायत की थी। लेकिन उन्होंने इस गंभीर मामले को नजरअंदाज करते हुए उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं दी। यह प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए जिला शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से उन्हें निलंबित कर दिया है।
शिक्षा विभाग ने की पुष्टि
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. संजय गुहे ने मीडिया को बताया कि आरोपी प्राचार्य को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है और महिला शिक्षक के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है। उनके बयान दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
समाज में रोष, प्रशासन पर सवाल
इस घटना से पूरे इलाके में रोष व्याप्त है। अभिभावकों और समाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर और सख्त नियम लागू किए जाएं। साथ ही, ऐसे मामलों में शामिल किसी भी कर्मचारी को बख्शा न जाए।छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले की यह घटना एक बार फिर से यह सोचने पर मजबूर करती है कि जिन संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, वहीं कभी-कभी जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही ऐसी शर्मनाक हरकतों को अंजाम दे रहे हैं। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह भी जरूरी है कि स्कूलों में सामाजिक जागरूकता, यौन शोषण विरोधी प्रशिक्षण और निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाए।










