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Chhattisgarh SIR 2025: मतदाता सूची से 5 लाख नाम कटे, रायपुर सबसे अधिक प्रभावित

Chhattisgarh SIR 2025:  छत्तीसगढ़ में निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान के पहले चरण ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और त्रुटिहीन बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस मुहिम के तहत रायपुर की सात और बलौदाबाजार की एक विधानसभा सीट से कुल 5 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। आयोग का तर्क है कि ये नाम फर्जी, डुप्लिकेट या अप्रासंगिक प्रविष्टियों के कारण काटे गए हैं, ताकि भविष्य के चुनावों में फर्जी वोटिंग की किसी भी गुंजाइश को खत्म किया जा सके।

Chhattisgarh SIR 2025: रायपुर जिला सबसे अधिक प्रभावित: 23% मतदाताओं की छुट्टी

इस अभियान का सबसे व्यापक असर प्रदेश की राजधानी रायपुर में देखने को मिला है। आंकड़ों के अनुसार, रायपुर जिले की सात विधानसभा सीटों से कुल 5,11,136 मतदाताओं के नाम विलोपित किए गए हैं। हटाए गए नामों में 3,87,330 मतदाता ऐसे हैं जो अपना पता बदल चुके हैं (शिफ्टेड), जबकि 23,180 मतदाता अनुपस्थित या अप्राप्य पाए गए। इसके अलावा 14,311 डुप्लिकेट नाम और 2,313 अतिरिक्त प्रविष्टियों को भी सूची से बाहर किया गया है। रायपुर की कुल 22 लाख आबादी में से लगभग 23% नामों पर हुई यह कार्रवाई शहर में बढ़ते माइग्रेशन और जनसंख्या असंतुलन की ओर इशारा करती है।

Chhattisgarh SIR 2025: नाम जुड़वाने का अंतिम अवसर: 31 दिसंबर है डेडलाइन

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर (SIR) का प्राथमिक उद्देश्य मतदाता सूची को 100% सटीक बनाना है। हालांकि, जिन मतदाताओं के नाम सूची से कटे हैं, उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई वास्तविक मतदाता प्रभावित हुआ है, तो वह 31 दिसंबर 2025 तक अपनी दावा-आपत्ति दर्ज करा सकता है। उचित सत्यापन के बाद उनके नाम पुनः मतदाता सूची में जोड़ दिए जाएंगे। यह अभियान विशेष रूप से उन 8 विधानसभाओं पर केंद्रित था जहाँ विसंगतियों की संभावना अधिक थी, जिनमें रायपुर, धमतरी और बिलासपुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का हमला: रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर सवाल

लाखों मतदाताओं के नाम काटे जाने के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग और भाजपा के बीच कथित ‘गठबंधन’ पर निशाना साधा। बघेल ने तीखा सवाल करते हुए पूछा कि जिन लाखों लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनमें से कितने रोहिंग्या और कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं? उन्होंने मांग की कि सरकार और आयोग को जनता को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए कि आखिर किस आधार पर इतनी बड़ी संख्या में नाम विलोपित किए गए हैं।

भाजपा का पलटवार: संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाना गलत

भूपेश बघेल के बयानों पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा प्रवक्ता विजय शंकर मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस को देश के संविधान और संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि एसआईआर एक नियमित संवैधानिक प्रक्रिया है जो कांग्रेस के शासनकाल में भी होती रही है। भाजपा ने सवाल किया कि क्या उस समय कांग्रेस इस प्रक्रिया का दुरुपयोग करती थी? रोहिंग्या के मुद्दे पर पलटवार करते हुए भाजपा ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही घुसपैठियों की समर्थक रही है और अब हार के डर से संवैधानिक प्रक्रियाओं को विवादित बना रही है।

सटीक मतदाता सूची से मजबूत होगा लोकतंत्र

निर्वाचन आयोग के अनुसार, 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद यह महसूस किया गया कि मतदाता सूची में कई ऐसी प्रविष्टियाँ हैं जो अब प्रासंगिक नहीं हैं। कई मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे या मृत हो चुके थे। इस छंटनी के बाद अब मतदाता सूची पहले से अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय हो जाएगी। आयोग का मानना है कि इससे न केवल चुनावी खर्च में कमी आएगी, बल्कि वास्तविक मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित कर लोकतंत्र की नींव को और अधिक मजबूती प्रदान की जा सकेगी।

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