Chhattisgarh Tribal Development : छत्तीसगढ़ के पूर्व माओवादी प्रभावित और दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। नियद नेल्ला-नार 2.0 और बस्तर मुन्ने 2.0 के तहत व्यक्तिगत और सामुदायिक योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय सीमा में पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। शुक्रवार को मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील ने इन योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए और पात्र लोगों को सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।
10 जिलों में मिशन मोड पर होगा योजनाओं का क्रियान्वयन
राज्य सरकार की इस पहल के दायरे में 10 जिले शामिल हैं। इनमें बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर, नारायणपुर, बस्तर, कोंडागांव, गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई शामिल हैं। इन जिलों के दूरस्थ गांवों और वनांचल क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी है। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने में अनावश्यक देरी न हो। इस पहल का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पात्र नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और सरकारी सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाना है।
31 व्यक्तिगत योजनाओं से पात्र परिवारों को मिलेगा लाभ
नियद नेल्ला-नार 2.0 और बस्तर मुन्ने 2.0 के तहत 31 व्यक्तिगत हितग्राही योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत, महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, वनाधिकार पट्टा, पेंशन और उज्ज्वला योजना जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से रोजगार, आवास, स्वास्थ्य सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, आर्थिक सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें संबंधित योजनाओं से जोड़ा जाए।
14 सामुदायिक योजनाओं से गांवों की बुनियादी सुविधाएं होंगी मजबूत
व्यक्तिगत योजनाओं के साथ 14 सामुदायिक योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी जोर दिया जा रहा है। इनके अंतर्गत सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र, मोबाइल टावर और बैंकिंग सुविधाओं जैसी आवश्यक सेवाओं को बेहतर बनाने का लक्ष्य है। दूरस्थ गांवों में इन सुविधाओं की उपलब्धता से स्थानीय निवासियों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए होने वाली परेशानियों में राहत मिल सकती है। बेहतर सड़क संपर्क, संचार नेटवर्क और बैंकिंग सुविधाएं सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने में भी मददगार हो सकती हैं। मुख्य सचिव ने विभागों को योजनाओं के क्रियान्वयन में तालमेल बनाए रखने और निर्धारित समयसीमा का पालन करने के निर्देश दिए।
आदिवासी बसाहटों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने पर जोर
समीक्षा बैठक के दौरान राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन की अपेक्स कमेटी की बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति और संचालन से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव विकासशील ने जल जीवन मिशन के तहत तैयार किए गए ढांचे के सुचारू संचालन और नियमित रखरखाव पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि आदिवासी बसाहटों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और जलापूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाए।
जलापूर्ति व्यवस्था की नियमित जांच और रखरखाव जरूरी
पेयजल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पानी की शुद्धता की नियमित जांच पर जोर दिया गया। केवल जलापूर्ति ढांचे का निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से संचालन और रखरखाव भी आवश्यक है। अधिकारियों को व्यवस्था की निगरानी करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो। नियद नेल्ला-नार 2.0 और बस्तर मुन्ने 2.0 के तहत योजनाओं की समीक्षा का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना है। अब संबंधित विभागों के सामने निर्धारित समयसीमा में योजनाओं को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी।
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