Chhattisgarh SIR
Chhattisgarh SIR : छत्तीसगढ़ में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने इस प्रशासनिक कवायद के दौरान सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। पार्टी का दावा है कि राजनीतिक लाभ के लिए एक विशेष वर्ग और विपक्षी समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है। कांकेर कलेक्टर कार्यालय में दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के बाद इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में जारी मतदाता सूची पुनरीक्षण के अंतिम चरण में गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस समर्थकों, सक्रिय कार्यकर्ताओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के परिजनों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जी आवेदन लगाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने इसे सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ बताया है। पार्टी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और साजिशकर्ताओं के खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।
पार्टी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, शहर के महादेव वार्ड और शीतला पारा वार्ड जैसे प्रमुख इलाकों में लंबे समय से रह रहे नागरिकों को ‘बाहरी’ बताकर उनके नाम काटने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि जिन लोगों के नाम काटने के लिए आवेदन दिए गए हैं, उनके पास साल 2003 से भी पुराने वैध दस्तावेज मौजूद हैं। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस सूची में एक पूर्व पार्षद और एक वर्तमान पार्षद के परिवार के सदस्यों के नाम भी शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर मतदाता सूची से बाहर करने की साजिश रची गई है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष बसंत यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को बीजेपी की राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका आरोप है कि राजनीतिक द्वेष के चलते कांग्रेस से जुड़े मतदाताओं को चिन्हित किया जा रहा है ताकि आगामी चुनावों में उनके वोटिंग अधिकारों को प्रभावित किया जा सके। उन्होंने अन्य राज्यों में हुए इसी तरह के मतदाता सूची विवादों का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में भी वही खेल दोहराया जा रहा है। कांग्रेस के अनुसार, यह प्रयास केवल वोट काटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव को कमजोर करना है।
कांग्रेस नेता सुनील गोस्वामी ने जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला पहलू सामने रखा है। उन्होंने बताया कि जब उन नागरिकों से संपर्क किया गया जिनके नाम से नाम काटने के आवेदन जमा किए गए थे, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया कि उन्होंने ऐसा कोई आवेदन दिया है। इससे यह आशंका गहरा गई है कि अज्ञात लोगों द्वारा फर्जी हस्ताक्षर या पहचान का दुरुपयोग करके ये आवेदन प्रशासनिक कार्यालय में जमा कराए गए। कांग्रेस ने मांग की है कि प्रत्येक आवेदन की सत्यता और आवेदक की पहचान की बारीकी से जांच हो।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कांकेर कलेक्टर नीलेश क्षीरसागर ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुष्टि की है कि कांग्रेस की ओर से औपचारिक शिकायत प्राप्त हुई है और इसकी जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन कर दिया गया है। कलेक्टर ने भरोसा दिलाया है कि यदि जांच में किसी भी तरह का फर्जीवाड़ा या नियम विरुद्ध कार्य पाया जाता है, तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रशासन अब हर आवेदन की पुनः समीक्षा कर रहा है।
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