छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Waqf Board : छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का सख्त कदम, ईद पर खुले में कुर्बानी देने पर रोक

Chhattisgarh Waqf Board : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मुस्लिम समुदाय के पवित्र त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने त्योहार के मद्देनजर एक नया और कड़ा आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किया है। बोर्ड के नव-निर्वाचित अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने इस संबंध में लिखित आदेश जारी करते हुए साफ शब्दों में कहा है कि राज्य के किसी भी हिस्से में, चाहे वह शहरी इलाका हो या ग्रामीण, खुले क्षेत्रों या सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी की रस्म अदा नहीं की जाएगी। वक्फ बोर्ड के इस फैसले को त्योहार के दौरान सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखने और नागरिक नियमों का पालन कराने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

शांति व्यवस्था और स्वच्छता बनाए रखना मुख्य उद्देश्य, मस्जिद कमेटियों को निर्देश

वक्फ बोर्ड द्वारा जारी किए गए इस कड़े आदेश के पीछे का मुख्य उद्देश्य त्योहार के दौरान प्रदेश में शांति व्यवस्था, सांप्रदायिक सौहार्द और सार्वजनिक साफ-सफाई को पूरी तरह से बनाए रखना है। बोर्ड प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश को सुचारू रूप से लागू करने के लिए राज्य की सभी मस्जिद कमेटियों, प्रबंध समितियों और ईदगाह प्रबंधन को सख्त हिदायत दी गई है। सभी समितियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मुस्लिम समाज के नागरिकों को इस नियम की जानकारी दें और इसका अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराएं, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति निर्मित न हो।

सुबह 6 से 11 बजे के बीच होगी ईद की नमाज, भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन मुस्तैद

जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ईद-उल-अजहा के दिन विशेष नमाज का समय भी पूरी तरह तय कर दिया गया है। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश की विभिन्न छोटी-बड़ी मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह 6:00 बजे से लेकर 11:00 बजे तक अलग-अलग पारियों में तय समय सारिणी के अनुसार नमाज अदा की जाएगी। वक्फ बोर्ड ने बताया कि त्योहार के दिन होने वाली भारी भीड़ के बेहतर प्रबंधन, कानून व्यवस्था और सुगम यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ही इस समय का निर्धारण किया गया है। इसके साथ ही, स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को भी संवेदनशील तथा अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

सार्वजनिक मर्यादा का ध्यान रखने की अपील, निर्धारित व निजी स्थानों का ही करें उपयोग

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का मानना है कि खुले क्षेत्रों, सड़कों के किनारे या सार्वजनिक मैदानों में कुर्बानी की रस्म को अंजाम देने से न केवल सामाजिक विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है, बल्कि इससे गंभीर स्वच्छता संबंधी समस्याएं और कानून व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। इसी वजह से बोर्ड ने मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध जनों और आम नागरिकों से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का पालन केवल पूर्व निर्धारित, चारदीवारी के अंदर या अपने निजी और तयशुदा स्थानों पर ही करें। बोर्ड ने यह भी दोहराया कि किसी भी धार्मिक आयोजन के दौरान आम जनता की नागरिक सुविधाओं और सार्वजनिक स्थानों की मर्यादा का ध्यान रखना हर सच्चे नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।

सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों की खैर नहीं, साइबर सेल को किया गया अलर्ट

आगामी त्योहार की संवेदनशीलता को देखते हुए वक्फ बोर्ड और पुलिस प्रशासन ने सोशल मीडिया को लेकर भी एक बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किसी भी प्रकार की भड़काऊ पोस्ट, आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो या किसी भी तरह की अफवाह फैलाने से बचने की सख्त हिदायत दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि समाज में अशांति फैलाने या गलत जानकारी साझा करने वाले किसी भी शरारती तत्व को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए पुलिस की विशेष साइबर सेल को चौबीसों घंटे ‘अलर्ट मोड’ पर रखा गया है, जो हर संदिग्ध अकाउंट पर पैनी नजर रख रही है।

त्याग, भाईचारे और इंसानियत का पर्व है ईद, आपसी सद्भाव के साथ मनाएं त्योहार

अपने आधिकारिक वक्तव्य के समापन पर छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने कहा कि ईद-उल-अजहा का यह मुकद्दस त्योहार मूल रूप से आपसी त्याग, बेमिसाल भाईचारे और सच्ची इंसानियत का संदेश देने वाला पर्व है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि देश और प्रदेश के सभी समुदायों के लोग एक-दूसरे की धार्मिक भावनाओं, आस्था और विश्वास का पूरा सम्मान करते हुए इस त्योहार को मिल-जुलकर हर्षोल्लास के साथ मनाएं। फिलहाल, रायपुर सहित छत्तीसगढ़ के तमाम बड़े जिलों में जिला प्रशासन, नगर निगम की सफाई टीमें और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से मुस्तैदी के साथ अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, ताकि यह पावन त्योहार पूरी तरह से शांतिपूर्ण, गरिमामयी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

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