छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Weather: अंबिकापुर में 6 डिग्री वाला टॉर्चर, रायपुर में कोहरे की चादर; जानें कब मिलेगी राहत

Chhattisgarh Weather: छत्तीसगढ़ के उत्तरी जिलों में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पहाड़ों से आ रही ठंडी हवाओं के कारण सरगुजा संभाग में न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, अंबिकापुर प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका बना हुआ है, जहाँ न्यूनतम तापमान गिरकर 6.3°C तक पहुँच गया है। उत्तर छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी रात के समय लोगों को अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

मैदानी इलाकों का हाल: दिन में धूप और रात में गुलाबी ठंड

मध्य छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों—रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर—में मौसम का दोहरा रूप देखने को मिल रहा है। यहाँ दिन के समय सूरज की तपिश महसूस की जा रही है, जिससे हल्की गर्मी का अहसास होता है, लेकिन सूरज ढलते ही पारा तेजी से नीचे गिर जाता है। रायपुर में अधिकतम तापमान 31°C के आसपास बना हुआ है, जबकि रात का तापमान 15°C तक गिर रहा है। यह तापांतर स्वास्थ्य के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है।

मौसम विभाग की भविष्यवाणी: अगले 7 दिनों का अनुमान

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आगामी 48 घंटों तक न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है। हालांकि, दो दिनों के बाद रात के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे ठंड से थोड़ी राहत मिल सकती है। जहां तक अधिकतम तापमान का सवाल है, अगले एक सप्ताह तक इसमें स्थिरता बनी रहेगी। जगदलपुर में बीते दिन प्रदेश का सर्वाधिक तापमान 31.2°C दर्ज किया गया, जो दक्षिण छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी का संकेत है।

कोहरे और धुंध का साया: दृश्यता पर पड़ेगा असर

आज, यानी 8 फरवरी को प्रदेश के कुछ विशिष्ट इलाकों में घने कोहरे की स्थिति बन सकती है। विशेषकर नदी तटीय क्षेत्रों और खुले मैदानों में सुबह के समय दृश्यता (Visibility) कम रहने का अनुमान है। राजधानी रायपुर में भी सुबह के वक्त हल्का धुंध छाया रह सकता है, जिससे वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

बढ़ता स्वास्थ्य जोखिम: बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा

मौसम के इस उतार-चढ़ाव का सबसे गंभीर असर छोटे बच्चों और नवजातों पर पड़ रहा है। रायपुर के अंबेडकर अस्पताल सहित विभिन्न निजी अस्पतालों में बीते एक महीने के भीतर हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के शरीर में गर्मी को संचित करने की क्षमता वयस्कों की तुलना में कम होती है, जिससे वे बहुत जल्दी ठंड की चपेट में आ जाते हैं।

विशेषज्ञों की राय: नवजातों की देखभाल है जरूरी

बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात शिशुओं की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होती हैं, जिसके कारण उनका शरीर तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता। विशेष रूप से सीजेरियन डिलीवरी (Surgical Delivery) से जन्मे बच्चों में हाइपोथर्मिया का जोखिम कहीं अधिक होता है। डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को गर्म कपड़ों में लपेटकर रखें और उनके शरीर के तापमान की नियमित निगरानी करें।

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