Chhattisgarh Weather
Chhattisgarh Weather: छत्तीसगढ़ में वर्तमान में मौसम के दो अलग-अलग मिजाज देखने को मिल रहे हैं। जहां सुबह और शाम के वक्त हल्की ठंड और कनकनी महसूस की जा रही है, वहीं दोपहर के समय सूरज की तपिश के कारण हल्की गर्मी का एहसास हो रहा है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पूरे प्रदेश में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है और आने वाले दिनों में यह स्थिति बरकरार रहने वाली है। हालांकि, अगले 3 दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की क्रमिक बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है, जिससे रात की ठंड में थोड़ी कमी आ सकती है।
पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तापमान में काफी अंतर देखा गया है। राजनांदगांव में अधिकतम तापमान 31.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने इसे राज्य का सबसे गर्म इलाका बना दिया। दूसरी ओर, उत्तर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में कड़ाके की ठंड जारी है, जहां न्यूनतम तापमान 8.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके साथ ही, मौसम वैज्ञानिकों ने जानकारी दी है कि 26 जनवरी 2026 से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। हालांकि, इसका छत्तीसगढ़ की मौसमी दशाओं पर कोई सीधा या बड़ा प्रभाव पड़ने के आसार नहीं हैं।
रायपुर में आज, 25 जनवरी की सुबह की शुरुआत हल्की धुंध और कोहरे के साथ हुई। विजिबिलिटी कम होने के कारण सुबह के समय वाहन चालकों को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिन चढ़ने के साथ ही आसमान पूरी तरह साफ हो जाएगा और अच्छी धूप खिलेगी। रायपुर में अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है। प्रदेश के अन्य मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में भी सुबह के वक्त धुंध छाई रहने की संभावना जताई गई है।
बदलते मौसम और कड़ाके की ठंड का सबसे बुरा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। रायपुर के प्रतिष्ठित अंबेडकर अस्पताल और अन्य निजी चिकित्सा केंद्रों में पिछले एक महीने के भीतर हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। यह एक चिंताजनक स्थिति है क्योंकि शिशुओं का शरीर वयस्कों की तुलना में बहुत तेजी से अपनी गर्मी खो देता है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि कड़कड़ाती ठंड बच्चों के नाजुक अंगों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए माता-पिता को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात शिशुओं की मांसपेशियां पूरी तरह विकसित नहीं होती हैं, जिसके कारण वे बाहरी ठंड के खिलाफ अपने शरीर का तापमान संतुलित नहीं कर पाते। विशेष रूप से सीजेरियन डिलीवरी (Surgical Delivery) के माध्यम से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा काफी अधिक होता है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बच्चों को परतों में कपड़े पहनाएं, उनके हाथ-पैर और सिर को ढक कर रखें और कमरे के तापमान को स्थिर बनाए रखें। किसी भी प्रकार की सुस्ती या शरीर के असामान्य ठंडा पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना अनिवार्य है।
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