Chhattisgarh Weather Update
Chhattisgarh Weather Update: बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) के असर से छत्तीसगढ़ के मौसम में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। सोमवार सुबह से ही प्रदेश के मध्य और उत्तरी हिस्सों में बादलों ने डेरा डाल रखा था। राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर में सुबह के समय गहरी बदली छाई रही, जिसके बाद दोपहर होते-होते हल्की से मध्यम रिमझिम बारिश शुरू हो गई। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना है, इसलिए नागरिकों को खुले क्षेत्रों में रहने से बचने की सलाह दी गई है।
मौसम का सबसे उग्र रूप सरगुजा संभाग और रायगढ़ जिले में देखने को मिला। बलरामपुर जिले के कुसमी और वाड्रफनगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दोपहर बाद अचानक मौसम ने करवट ली। यहाँ न केवल तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश हुई, बल्कि कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि (ओले गिरना) भी दर्ज की गई। अचानक हुई इस ओलावृष्टि ने पूरे क्षेत्र को सफेद चादर से ढक दिया, जिससे तापमान में भी गिरावट महसूस की गई। अचानक आए इस आंधी-तूफान ने जनजीवन को कुछ समय के लिए अस्त-व्यस्त कर दिया है।
फरवरी के महीने में हुई इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं की माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। वर्तमान में खेतों में गेहूं, सरसों और चने की फसलें कटने की स्थिति में हैं या पक कर तैयार हैं। वाड्रफनगर और बलरामपुर के किसानों का कहना है कि ओले गिरने से सरसों की फलियां टूट गई हैं और गेहूं की खड़ी फसल बिछ जाने की आशंका है। यदि अगले 48 घंटों तक यही स्थिति बनी रहती है, तो रबी की फसलों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिरने का डर है।
भले ही बारिश ने माहौल को थोड़ा ठंडा किया है, लेकिन मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक अधिकतम और न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव होने की संभावना नहीं है। पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो राजनांदगांव प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहाँ पारा 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। वहीं, उत्तरी छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो राज्य में सबसे कम रहा। मैदानी इलाकों में दोपहर की गर्मी बरकरार है, जबकि शाम होते ही हल्की ठंडक महसूस की जा रही है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में कम दबाव का एक मजबूत क्षेत्र सक्रिय है। यह सिस्टम हवा को अपनी ओर तेजी से खींच रहा है, जिसके कारण वायुमंडल में लगभग 6 किलोमीटर की ऊंचाई तक घने बादल बनने की स्थिति निर्मित हुई है। मौसम का यह सिस्टम फिलहाल पश्चिम-उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसके उत्तर-पूर्व की ओर मुड़ने की संभावना है। इस भौगोलिक बदलाव के कारण ही छत्तीसगढ़ के वातावरण में नमी आई है और बारिश की अनुकूल परिस्थितियाँ बनी हैं।
मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में अगले 48 घंटों तक मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहेगा। राज्य के कुछ जिलों में आंधी-तूफान के साथ ओले गिरने और हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि किसान अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें। यह मौसमी सिस्टम अगले दो दिनों तक सक्रिय रहने के बाद धीरे-धीरे कमजोर पड़ेगा, जिसके बाद आसमान साफ होने की उम्मीद है। फिलहाल, प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
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