K Visa China: H-1B वीजा की फीस बढ़ते ही चीन ने लॉन्च किया ‘K वीजा’: विदेशी टैलेंट को लुभाने की नई चाल

K Visa China: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा की फीस में भारी बढ़ोतरी के बाद चीन ने विदेशी प्रोफेशनल्स को आकर्षित करने के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। चीन ने 1 अक्टूबर 2025 से लागू होने वाले ‘K वीजा’ की घोषणा की है, जो STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) सेक्टर के प्रोफेशनल्स, रिसर्चर्स और स्टार्टअप एंट्रेप्रेन्योर्स के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है।

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क्या है K वीजा और क्यों है खास?

‘K वीजा’ चीन की मौजूदा R और Z वीजा कैटेगरीज की तुलना में कहीं अधिक लचीला और दीर्घकालिक होगा। जहां Z वीजा के तहत केवल एक वर्ष और R वीजा के तहत अधिकतम 180 दिन तक रुकने की अनुमति होती है, वहीं K वीजा के जरिए विदेशी टैलेंट को लंबी अवधि तक चीन में रहने, काम करने और उद्यम शुरू करने की छूट दी जाएगी।

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इस वीजा के जरिए चीन न केवल विज्ञान और तकनीक से जुड़े प्रोफेशनल्स को आमंत्रित करेगा, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, अनुसंधान और व्यवसाय के क्षेत्रों में भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देगा।

आसान प्रक्रिया, लोकल एम्प्लॉयर की जरूरत नहीं

K वीजा की एक बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए आवेदन प्रक्रिया को काफी सरल और पारदर्शी बनाया गया है। अन्य वीजा कैटेगरीज की तरह इसके लिए किसी लोकल कंपनी या एम्प्लॉयर से स्पॉन्सरशिप की जरूरत नहीं होगी। आवेदनकर्ता की योग्यता, अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर वीजा जारी किया जाएगा।

दक्षता होगी प्राथमिकता, न कि नौकरी का ऑफर – यही K वीजा की सबसे बड़ी यूएसपी है।

अमेरिकी H-1B वीजा से तुलना

H-1B वीजा की फीस में हाल ही में की गई बढ़ोतरी के बाद जहां पहले इसके लिए लगभग 6 लाख रुपये खर्च होते थे, अब इसकी लागत बढ़कर लगभग 88 लाख रुपये तक पहुंच गई है। यह बदलाव दुनियाभर के हजारों युवा प्रोफेशनल्स और स्टार्टअप्स के लिए बड़ा झटका है।चीन ने इसी अंतरराष्ट्रीय असंतुलन का फायदा उठाते हुए ‘आपदा में अवसर’ तलाशा है और K वीजा के जरिए अपने देश को वैश्विक टैलेंट हब बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

चीन की वैश्विक रणनीति

चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग के निर्देश पर इस वीजा की घोषणा की गई है। इससे पहले चीन ने अपने इमिग्रेशन नियमों में बदलाव करते हुए एंट्री और एग्जिट से जुड़े कई प्रतिबंधों को भी कम किया है। इससे साफ है कि चीन अब विदेशी टैलेंट को अपने देश की विकास योजनाओं में जोड़ने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रहा है।

जहां एक ओर अमेरिका ने H-1B वीजा को महंगा और जटिल बना दिया है, वहीं चीन ने K वीजा के रूप में एक नया, सरल और आकर्षक विकल्प पेश किया है। आने वाले समय में यह देखा जाना बाकी है कि ग्लोबल प्रोफेशनल्स इस विकल्प की ओर कितनी तेजी से रुख करते हैं। लेकिन एक बात साफ है – चीन अब टैलेंट वॉर में मजबूती से उतर चुका है।

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