China Nuclear Threat
China Nuclear Threat: अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की एक हालिया रिपोर्ट ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में खलबली मचा दी है। इस विस्तृत रिपोर्ट में चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य शक्ति और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर गंभीर खुलासे किए गए हैं। पेंटागन के अनुसार, चीन ने अपनी परमाणु रणनीति को आक्रामक रूप देते हुए मंगोलियाई सीमा के पास अपने तीन नए साइलो क्षेत्रों में 100 से अधिक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) तैनात कर दी हैं। यह तैनाती न केवल एशिया, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए भी एक बड़ी सामरिक चुनौती मानी जा रही है।
पेंटागन की रिपोर्ट में इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि ये मिसाइलें ठोस ईंधन (Solid Fuel) पर आधारित DF-31 श्रेणी की हैं। ठोस ईंधन वाली मिसाइलों की विशेषता यह होती है कि इन्हें बहुत कम समय में लॉन्च किया जा सकता है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता। चीन ने इन मिसाइलों को मंगोलिया की सीमा के निकट विशेष रूप से निर्मित साइलो क्षेत्रों (भूमिगत मिसाइल अड्डों) में छिपा रखा है। हालांकि अमेरिका ने पहले भी इन अड्डों की मौजूदगी का संकेत दिया था, लेकिन यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलों की तैनाती की पुष्टि का अनुमान लगाया गया है।
‘बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में दुनिया का कोई भी अन्य परमाणु संपन्न देश चीन जितनी तेजी से अपने शस्त्रागार का विस्तार नहीं कर रहा है। चीन न केवल अपनी पुरानी मिसाइलों को अपग्रेड कर रहा है, बल्कि नई पीढ़ी के परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण भी कर रहा है। पेंटागन का मानना है कि चीन का यह व्यवहार वैश्विक सैन्य संतुलन को बिगाड़ने वाला है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए संधियाँ की जा रही हैं, लेकिन चीन इन नियमों को ताक पर रखकर अपनी ताकत बढ़ा रहा है।
रिपोर्ट का एक सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बीजिंग अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ किसी भी प्रकार की हथियार नियंत्रण वार्ता में शामिल होने का इच्छुक नहीं है। अमेरिकी कांग्रेस में पेश किए जाने वाले इस मसौदे (Draft) में दावा किया गया है कि चीन परमाणु निरस्त्रीकरण की चर्चाओं से जानबूझकर बच रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार रूस और चीन के साथ एक व्यापक परमाणु समझौते की इच्छा व्यक्त की है, लेकिन पेंटागन की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि चीन की रुचि पारदर्शी बातचीत के बजाय गुप्त रूप से अपनी शक्ति बढ़ाने में अधिक है।
हालांकि इस रिपोर्ट में विस्तार से तैनाती का जिक्र है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन 100 से अधिक मिसाइलों का संभावित लक्ष्य कौन से देश या क्षेत्र हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लंबी दूरी की मिसाइलों की पहुंच अमेरिका के मुख्य भूभाग तक आसानी से हो सकती है। लक्ष्यों का उल्लेख न होना इस खतरे को और भी रहस्यमयी और गंभीर बनाता है। इसी अनिश्चितता के कारण अमेरिका सहित कई यूरोपीय देश चीन की सैन्य बढ़त को लेकर अपनी चिंताएं लगातार व्यक्त कर रहे हैं।
दूसरी ओर, चीन ने इन सभी दावों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने एक बयान जारी कर कहा कि यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने और चीन की छवि को धूमिल करने का एक सोची-समझी साजिश है। चीन का तर्क है कि वह केवल अपनी राष्ट्रीय रक्षा के लिए ‘न्यूनतम आवश्यक’ परमाणु भंडार रखता है और उसकी नीति हमेशा रक्षात्मक रही है। चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अपने सैन्य खर्च को सही ठहराने के लिए ‘चीन के खतरे’ का हौवा खड़ा कर रहा है।
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