CJI Cockroach Remark: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की ओर से कथित तौर पर ‘कॉकरोच’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि अदालत की टिप्पणी में इस शब्द का संदर्भ किस व्यक्ति या समूह से था। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि यह टिप्पणी पत्रकार और CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास के संदर्भ में की गई थी।
अभिजीत दीपके ने सौरव दास का नाम जोड़ा
एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में सौरव दास ने अपने पत्रकारिता करियर और कानून से जुड़े विषयों पर किए गए काम का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वह कानून के मुद्दों पर लिखते हैं और विशेष रूप से न्यायपालिका तथा जजों से जुड़े मामलों पर उनकी रिपोर्टिंग रही है। इसी बातचीत के दौरान अभिजीत दीपके ने दावा किया कि जिस समय ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल हुआ, उस दौरान सौरव दास ही CJI सूर्यकांत को लेकर सबसे अधिक लिख रहे थे।
सौरव दास ने बताई उस समय की पूरी स्थिति
सौरव दास के मुताबिक, उस टिप्पणी के बाद कई वकीलों और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अदालत में की गई टिप्पणी संभवतः उन्हीं के संदर्भ में थी। दास ने बताया कि उस समय वह ‘द कारवां’ मैगजीन के लिए तत्कालीन जज सूर्यकांत पर एक प्रोफाइल तैयार कर रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले वह पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ से संबंधित विषयों पर भी लिख चुके थे।
RTI के जरिए जुटाई जा रही थी जानकारी
सौरव दास ने बातचीत के दौरान बताया कि न्यायपालिका से जुड़े अपने लेखन के लिए उन्होंने कुछ आरटीआई आवेदन भी दायर किए थे। उनके अनुसार, वह जजों और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी जुटाकर अपनी रिपोर्टिंग तैयार कर रहे थे। इसी पृष्ठभूमि में अदालत की टिप्पणी और उसके संभावित संदर्भ को लेकर उनके नाम की चर्चा शुरू हुई।
‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ शब्दों पर विवाद
दास के अनुसार, सीजेआई की टिप्पणी में ऐसे युवाओं का उल्लेख किया गया था, जो नौकरी नहीं मिलने के बाद पत्रकारिता में आते हैं और बाद में आरटीआई कार्यकर्ता बनकर व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। इसी संदर्भ में ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हुआ। हालांकि, इस टिप्पणी का वास्तविक संदर्भ क्या था, इसे लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
CJI ने बाद में टिप्पणी पर दी थी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद सीजेआई सूर्यकांत ने अदालत में अपनी टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने कहा था कि सुनवाई के दौरान उनकी मौखिक टिप्पणियों को मीडिया के एक हिस्से में गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उनका कहना था कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य देश के बेरोजगार युवाओं की आलोचना करना नहीं था।
फर्जी डिग्री वालों पर टिप्पणी का दावा
सीजेआई सूर्यकांत ने अपनी सफाई में कहा था कि उनकी आलोचना उन लोगों को लेकर थी, जो कथित तौर पर नकली या फर्जी डिग्रियों के माध्यम से वकालत जैसे पेशों में प्रवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग केवल कानून के क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित पेशों में भी प्रवेश कर सकते हैं। उनके अनुसार, इसी संदर्भ में ‘परजीवी’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था।
युवाओं पर टिप्पणी से किया इनकार
सीजेआई ने स्पष्ट किया कि उनकी बात को देश के युवाओं पर टिप्पणी के तौर पर पेश करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कहना बेबुनियाद है कि उन्होंने बेरोजगार युवाओं या युवा पेशेवरों को निशाना बनाया था। इस स्पष्टीकरण के बावजूद ‘कॉकरोच’ शब्द किसके संदर्भ में इस्तेमाल हुआ था, इस सवाल को लेकर बहस जारी है।
CJP के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
फिलहाल अभिजीत दीपके और सौरव दास की ओर से सामने रखे गए दावों के अलावा इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि सीजेआई की टिप्पणी विशेष रूप से सौरव दास के लिए ही थी। इसलिए पूरे मामले में अदालत की मूल टिप्पणी, उसका संदर्भ और बाद में दिया गया स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण हो जाता है। विवाद का अंतिम निष्कर्ष इन्हीं तथ्यों के आधार पर निकाला जा सकता है।
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