CJP Protest: दिल्ली के कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके के प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं मिली है। दीपके ने शुक्रवार शाम 6 बजे सेंट्रल पार्क में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। हालांकि, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने इस आयोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर विवाद और गहरा गया है। CJP की ओर से प्रदर्शन की घोषणा ऐसे समय में की गई, जब दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्धारित स्थानों और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर पहले से बहस जारी है।
CJP प्रदर्शन का मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा
कनॉट प्लेस में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन का मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि वह शुक्रवार को कनॉट प्लेस में प्रदर्शन के आह्वान को नियंत्रित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। अदालत ने पुलिस के इस बयान को रिकॉर्ड पर ले लिया। इस मामले में व्यापारियों की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि यदि प्रदर्शन आयोजित हुआ, तो बाजार के कारोबार और आम लोगों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, अदालत में मामले की सुनवाई जारी रहने के बीच प्रदर्शन को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है।
व्यापारियों ने कारोबार प्रभावित होने की जताई चिंता
कनॉट प्लेस के व्यापारियों ने प्रस्तावित प्रदर्शन के खिलाफ अदालत में अपनी चिंता जाहिर की। व्यापारियों की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि विरोध प्रदर्शनों के कारण कारोबार पहले ही प्रभावित हो चुका है। उनका कहना था कि कनॉट प्लेस दिल्ली का प्रमुख व्यावसायिक और सार्वजनिक क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में लोग खरीदारी और अन्य कामों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रदर्शन होने पर व्यापारियों को और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत से मांग की कि CJP को कनॉट प्लेस में विरोध प्रदर्शन का आह्वान करने से रोका जाए। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित की गई है।
अभिजीत दीपके बोले, तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं
अभिजीत दीपके ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लोगों से शुक्रवार शाम सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज लेकर एकत्र होने की अपील की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि CJP के सदस्य सौरभ दास और आशुतोष रांका को तिरंगा लहराने के लिए जेल भेजा गया। दीपके ने अपने संदेश में कहा कि वे यह दिखाएंगे कि तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। हालांकि, दोनों सदस्यों की न्यायिक हिरासत से जुड़ी कार्रवाई में अन्य आरोप भी शामिल बताए गए हैं। इसलिए इस मामले को केवल राष्ट्रीय ध्वज लहराने से जोड़कर देखना पूरी कानूनी स्थिति को नहीं दर्शाता।
सौरभ दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल में बंद
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सौरभ दास और आशुतोष रांका को शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉण्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश करने के आरोप में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। दोनों को तिहाड़ जेल में रखा गया है। इसी बीच, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने का मुद्दा भी चर्चा में है। अब कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन पर प्रशासन की असहमति, व्यापारियों की याचिका और हाई कोर्ट की सुनवाई ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। अगली सुनवाई में मामले से जुड़ी आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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