राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच अब नए सिरे से होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित नई SIT में अयोध्या के DIG और SSP को शामिल किया गया है। जांच टीम में बदलाव के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि नई जांच में कौन से तथ्य सामने आते हैं।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच अब नए सिरे से होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद गठित नई SIT में अयोध्या के DIG और SSP को शामिल किया गया है। जांच टीम में बदलाव के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि नई जांच में कौन से तथ्य सामने आते हैं।

Ram Mandir Donation Scam: उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर चंदा चोरी और कथित गबन मामले की जांच को और अधिक प्रभावी तथा निष्पक्ष बनाने के लिए नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों और तय दिशा-निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। सरकार का उद्देश्य इस संवेदनशील मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना है, ताकि सभी तथ्यों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सामने लाया जा सके। नई टीम के गठन के बाद जांच में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।


राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नई एसआईटी में अनुभवी पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। टीम में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस, अयोध्या रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक (डीआईजी) सोमेन वर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. गौरव ग्रोवर को जिम्मेदारी दी गई है। शासन का मानना है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में जांच अधिक व्यवस्थित और कानूनी रूप से मजबूत होगी। नई टीम ने गठन के तुरंत बाद मामले की समीक्षा शुरू कर दी है और जांच से जुड़े सभी दस्तावेजों का दोबारा परीक्षण किया जा रहा है।

नई एसआईटी ने अपने काम की शुरुआत करते हुए जांच की गति तेज कर दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, टीम 27 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी पहली स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगी। इस रिपोर्ट में अब तक की जांच, जुटाए गए साक्ष्य, आगे की कार्रवाई और जांच की वर्तमान स्थिति का विस्तृत ब्यौरा शामिल किए जाने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की निगरानी कर रहा है, इसलिए जांच एजेंसी पर तथ्यों को समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।
इससे पहले गठित एसआईटी की संरचना नई टीम से अलग थी। पुरानी जांच टीम में प्रशासनिक और वित्त विभाग के अधिकारियों की प्रमुख भूमिका थी। उसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार जैसे अधिकारी शामिल थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार ने जांच का स्वरूप बदलते हुए इसकी कमान सीधे पुलिस विभाग को सौंप दी। माना जा रहा है कि इससे आपराधिक पहलुओं, वित्तीय लेन-देन और संभावित गड़बड़ियों की जांच अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
यह पूरा मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे की गिनती, रिकॉर्डिंग तथा बैंक खातों में जमा करने की प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में वित्तीय गड़बड़ियां हुईं और कुछ धनराशि का कथित रूप से गबन किया गया। इसी वजह से मामले की गहन जांच शुरू की गई, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पूरी प्रक्रिया में कहां और कैसे अनियमितताएं हुईं तथा इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

पूर्व में गठित एसआईटी ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, दान रजिस्टर, नकदी प्रबंधन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की विस्तार से जांच की थी। इसके अलावा मंदिर से जुड़े कई कर्मचारियों और संबंधित लोगों से पूछताछ भी की गई थी। शुरुआती जांच में कुछ अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों ने आरोपियों के पास से कथित गबन की रकम से खरीदी गई नकदी, वाहन, निवेश संबंधी दस्तावेज और अन्य संपत्तियां भी बरामद की थीं। अब नई एसआईटी इन सभी साक्ष्यों की दोबारा समीक्षा करते हुए जांच को आगे बढ़ाएगी, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष और तथ्यात्मक तस्वीर सामने लाई जा सके।
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